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गढ़वाली की याद में प्रदर्शन, बुलडोजर राज का विरोध

Ramesh Kuriyal
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देहरादून/हरिद्वार/श्रीनगर। राज्य के विभिन्न हिस्सों—हरिद्वार, श्रीनगर, देहरादून, रामनगर, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर, चमियाला समेत कई क्षेत्रों में रविवार को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और पेशावर विद्रोह के सिद्धांतों को याद करते हुए विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में राज्य में कथित नफरती राजनीति, बुलडोजर कार्रवाई और देशभर में मजदूरों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई गई।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मजदूर आंदोलनों पर दमन किया जा रहा है और लोगों के कानूनी अधिकारों की अनदेखी कर बुलडोजर कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाना, सामाजिक समस्याओं को धार्मिक रंग देना और मोहल्लों को धर्म के आधार पर बांटने जैसी नीतियां असंवैधानिक हैं।

देहरादून में दीन दयाल पार्क में आयोजित जनसभा में वक्ताओं ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान पेशावर विद्रोह के सिद्धांतों को याद करते हुए कहा गया कि वर्तमान सरकार और उससे जुड़े संगठन इन मूल्यों के विपरीत कार्य कर रहे हैं।

सभा में महंगाई, बेरोजगारी, गैस संकट और नई श्रम संहिताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि नोएडा समेत देशभर में मजदूर इन समस्याओं को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार इन पर ध्यान देने के बजाय बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट घरानों को संरक्षण देने में लगी है।

कार्यक्रम में कांग्रेस के संजय शर्मा, देवेंद्र नौटियाल, मुशर्रफ अली समेत कई नेता मौजूद रहे। इसके अलावा उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत और चंद्रकला, स्थाई राजधानी गैरसैंण संघर्ष समिति के विनोद राठौड़ी, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, राजेंद्र शाह, सुनीता देवी, घनश्याम और प्रभु पंडित, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश सचिव गंगाधर नौटियाल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नरेश नौडियाल, सीपी शर्मा और कुलदीप मधवाल, उत्तराखंड इंसानियत मंच के हरी ओम पाली, उत्तराखंड लोकतांत्रिक मोर्चा के पीसी थपलियाल, पूर्व बार काउंसिल अध्यक्ष रजिया बेग, तंजीम-ए-रहनुमा-ए-मिल्लत के लताफत हुसैन, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जीतेन भारती और अस्मिता की दीपा कौशलम सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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