देहरादून। प्रदेश में सरकारी और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार जल्द ही राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण का गठन करने जा रही है। यह प्राधिकरण सभी विद्यालयों के लिए न्यूनतम मानक तय करेगा और फीस वृद्धि सहित विभिन्न शिकायतों का निपटारा करेगा।
प्रस्तावित प्राधिकरण राज्य के 16,501 सरकारी और 5,396 निजी विद्यालयों पर लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी, सुविधाओं की कमी और पारदर्शिता से जुड़ी शिकायतों को नियंत्रित करना है।
नए ड्राफ्ट के अनुसार, प्राधिकरण एक स्वतंत्र और अर्धन्यायिक संस्था होगी, जिसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने, दंड देने और आवश्यकता पड़ने पर मान्यता समाप्त करने का अधिकार भी होगा। यह संस्था स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षा मानक, शिक्षकों की संख्या और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करेगी।
प्राधिकरण की एक अहम जिम्मेदारी स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले विषयों, फीस संरचना और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक कराना भी होगी। साथ ही निजी विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए वेतनमान निर्धारित करने का काम भी यही संस्था करेगी।
प्राधिकरण की संरचना
प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य शामिल होंगे। अध्यक्ष के रूप में किसी शिक्षाविद, सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी या सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया जाएगा।
सदस्यों में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा, निदेशक एससीईआरटी, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूलों के प्रधानाचार्य तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार, वित्त विभाग इस प्रस्ताव पर अपना परामर्श दे चुका है और अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस पर अंतिम निर्णय के लिए बैठक प्रस्तावित है।
अपर शिक्षा निदेशक पद्मेंद्र सकलानी ने बताया कि प्राधिकरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए सिरे से ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसमें शिक्षा विभाग के साथ अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।



