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सस्ते इलाज के पक्षधर हैं डॉ.प्रियंक उनियाल

देहरादून। कुछ लोग आज भी अपने प्रदेश में रहकर पहाड़ के लिए दिन रात समर्पित हैं, इस कड़ी में हैं युवा डॉक्टर, डॉ. प्रियंक उनियाल भी शामिल है।

डॉ.प्रियंक उनियाल

 

डॉ.प्रियंक उनियाल उत्तरखंड के पहले सुपर स्पेशलिस्ट स्पाइन सर्जन हैं। इनका जन्म उत्तरकाशी श्हार के बाड़ाहाट में हुआ। शुरुवाती शिक्षा टिहरी में हुई। डॉ उनियाल की मां उत्तरकाशी के महिमानंद कुड़ियाल की पुत्री हैं।

डॉ उनियाल ने स्पाइन सर्जरी की डिग्री कोरिया के विश्व के सर्वश्रेष्ठ और एक लेजेंड माने जाने वाले डॉ गन चोईi के मार्गदर्शन में की थी। डॉ चोई ने डॉ.प्रियंक को सुपरस्पेशलिटी डिग्री करने के पश्चात विदाई में आशीर्वाद और स्नेह स्वरुप अपने बेशकीमती पर्सनल ऑपेरशन करने के उपकरण और औज़ार का पूरा सेट भेंट किया था। कोरिया से डॉक्टरी की फाइनल पढाई पूर्ण करने के बाद वह अपने अन्य डॉक्टर सहपाठियों के तरह अमेरिका आदि न जाकर वापस उत्तराखंड आये।

वर्तमान में मैक्स हॉस्पिटल देहरादून में कार्यकर्त डॉ उनियाल इससे पहले एम्स ऋषिकेश, हिंदू राव हॉस्पिटल , नई दिल्ली, मल्ल्या हॉस्पिटल, बैंगलोर अदि में सेवाएं दे चुके हैं| अभी तक डॉ. प्रियंक कई लोगो की मदद कर चुके। वह हमेशा सस्ते इलाज के पक्षधर रहे हैं। उनहें अच्छे कार्य और सेवा देना बहुत प्रभावित करता है। समय समय पर उन्होंने गांव में मेडिकल कैम्प्स भी लगाए हैं। वह उन डॉक्टर के लिए मिसाल हैं जो पहाड़ पर नही जाना चाहते। प्रियंक लगातार अपने काम से समय निकालकर पहाड़ के लोगो के बीच समय बिताते हैं और उन्हें स्वास्थ संबंधी जानकारी देते रहते हैं।

डॉ प्रियंक उनियाल का बचपन संघर्षों से गुजरा। लगभग दस वर्ष पूर्व चंबा और ऋषिकेश के बीच आगराखाल के पास एक बेहद दर्दनाक बस हादसा हुआ था जिसमे 35 लोगों की जान गई थी | इसी एक्सीडेंट में प्रियंक के पिता डॉ.राजेन्द्र प्रसाद उनियाल भी अपनी पत्नी और माता पिता के साथ सफर कर रहे थे । इस एक्सीडेंट में डॉ.उनियाल का अपने माता पिता सहित देहांत हुआ। पत्नी की जान किसी तरह चमत्कारिक रूप से बच गई। मगर उनको सिर में गहरी गंभीर चोट के साथ रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर साथ में पति/ माता पिता की मौत का जबरदस्त सदमा। एक वर्ष बिस्तर पर बिता कर उन्होने मौत से लड़कर किसी जीत पाई क्यों की अभी उनके ऊपर 3 बच्चों की पूरी जिम्मेदारी थी। परिवार बुरी तरह टूट और बिखर गया। आगे डॉक्टरी की पढाई जारी रखने के लिए बेहद सीमित संसाधन थे । प्रियक के चाचा जी ने पूरे परिवार का साथ दिया और सबको सम्भाला ।

डॉ.प्रियंक की पत्नी डॉ.कृति कुमाऊं से हैं और एक वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ है और देहरादून के कैलाश हॉस्पिटल में कार्यरत है। दोनों डॉक्टर पति पत्नी एक सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर होने के साथ साथ एक बहुत अच्छे सरल इंसान और समाजसेवी भी हैं ।इतनी कम उम्र में डॉ.प्रियंक आज चिकित्सा जगत में काफी प्रख्यात हो चुके हैं। उन्हें दूसरे प्रदेशों और विदेश में गेस्ट फैकल्टी के रूप में आमंत्रित किया जाता है। उनका कहना है कि मेडिकल सुविधा की कमी यपलायन का कारण है। कहा कि वह डॉक्टर के रूप में कल के दिन पहाड़ों के लिए कुछ बड़ा कर पाते है तो यही उसकी उपलब्धि होगी |

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