टीएमयू में कृत्रिम मानव शरीर पर कराई हैंड्स ऑन प्रैक्टिस

Ramesh Kuriyal
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कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ के रेडियोलॉजी विभाग में फर्स्ट ऐड एंड सीपीआर इन डिजिटल वर्ल्ड पर हुई वर्कशॉप, सीपीआर के समय डेंजर, रिसपॉन्स, एयरवे, ब्रीथिंग, काल एन एम्बुलेंस-डीआरएबीसी का रखें ध्यान: सचिन चण्डोला

एम्स, नई दिल्ली के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ श्री सचिन चण्डोला ने सीपीआर के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, सीपीआर आपातकाल के समय हार्ट और फेफड़ों को पुनर्जीवित करने का एक तरीका है। अगर अचानक से कोई व्यक्ति गिर जाए तो उस समय सीपीआर देते समय डेंजर, रिसपॉन्स, एयरवे, ब्रीथिंग, काल एन एम्बुलेंस- डीआरएबीसी का ध्यान रखना आवश्यक है।

श्री चण्डोला तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ के रेडियोलॉजी विभाग में फर्स्ट ऐड एंड सीपीआर इन डिजिटल वर्ल्ड पर आयोजित वर्कशॉप में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पहले एम्स, नई दिल्ली के एनेस्थीसिया विशेषज्ञ श्री सचिन चण्डोला ने बतौर मुख्य अतिथि, पैरामेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार, आरआईटी की एचओडी श्रीमती प्रियंका सिंह आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके वर्कशॉप का शुभारम्भ किया।

श्री चण्डोल ने कृत्रिम मानव शरीर पर स्टुडेंट्स को चरणबद्ध तरीके से हैंड्स ऑन प्रैक्टिस भी दी । कार्यशाला का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को आपातकाल में हुए ह्दय से जुड़ी समस्या को समझाना और फर्स्ट ऐड के रूप में सीपीआर का उपयोग करना सिखाना था।

डीआरएबीसी को विस्तार से समझाते हुए श्री सचिन बोले, डेंजर का अर्थ है, जब आप मरीज को सीपीआर दें तो इस बात का ध्यान रखें कि उसमें चलती गाड़ी, विद्युत ऊर्जा, स्मोक या फायर का खतरा तो नहीं है। रिस्पॉन्स का मतलब मरीज की आवाज से है। मसलन, मरीज सीपीआर के बाद जवाब देता है या नहीं। एयरवे से आशय मरीज की श्वसन नलिका से है, जिसमें हम श्वास नली की अवरोधन क्षमता का पता करते हैं।

ब्रीथिंग का मतलब श्वसन की प्रक्रिया से है अर्थात मरीज में श्वसन क्रिया सही हो रही है। कॉल एन एम्बुलेंस का आशय है, अगर मरीज सही से सांस नहीं ले पा रहा है तो ऐसी आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस को बुलाना। वर्कशॉप के दौरान श्रीमती ममता वर्मा, श्री रोशन कुमार, श्री दीपक कटियार, श्रीमती प्राची सिंह, डॉ. आभा तिवारी, श्री अमित बिष्ट, श्रीमती रश्मि पाण्डेय के संग-संग आरआईटी के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संचालन स्टुडेंट्स वाशु सक्सेना और भारवी जोशी ने किया।

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