92 वर्ष की उम्र में देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित आवास में ली अंतिम सांस

Ramesh Kuriyal
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देहरादून । यूपी में मंत्री रहने के दौरान आयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि आंवटन की सहमति देने वाले केदार सिंह फोनिया नहीं रहें।
बदरीनाथ और उससे पूर्व विस्तृत बदरी केदार क्षेत्र के पूर्व विधायक और पूर्व पर्यटन मंत्री केदार सिंह फोनिया का बृहस्पतिवार रात को निधन हो गया है। वे 92 वर्ष के थे। उन्होंने देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित निवास में अंतिम सांस ली। पूर्व विधायक फोनिया के निधन की सूचना से चमोली जनपद में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

केदार सिंह फोनिया उत्तर प्रदेश में भी मंत्री रहे और उत्तराखंड राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में भी कैबिनेट मंत्री रहे। वे स्वच्छ छवि के बेदाग नेता थे, उनकी कर्मठता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है. कि जब वे मात्र 18 वर्ष के थे तो उन्हें चीन से व्यापार का परमिट जारी किया गया था। अनेक पुस्तकों के लेखक स्व. फोनिया का जीवन उपलब्धियों भरा रहा है। अपने क्षेत्र के विकास और लोगों की सेवा उनका परम ध्येय था। चमोली जिले ने उनके निधन से एक कद्दावर नेता को खो दिया है।
वर्ष 2007 में बदरीनाथ क्षेत्र से चुनाव जीतने के बावजूद खंडूरी सरकार में केदार सिंह फोनिया को आपसी तालमेल नहीं होने से मंत्रालय नहीं मिल पाया था। हालांकि वे श्री खंडूड़ी के बालसखा भी थे। केदार सिंह फोनिया ने औली को पर्यटन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उत्तराखंड के तीर्थ एवं मंदिर उनकी पुस्तक उत्तराखंड के पर्यटन के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण है। स्वर्गीय फोनिया बहुत इमानदार और स्वच्छ छवि के नेता थे। आज वे इस संसार से महाप्रयाण कर गए लेकिन ईमानदारी से राजनीति करने के लिए उन्हें युगों युगों तक याद किया जाएगा। उनके निधन पर जिले के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे जिले के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
इस बीच उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने भी पूर्व कैबिनेट मंत्री केदार सिंह फोनिया के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है। उन्होंने केदार सिंह फोनिया को उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में बतौर पर्यटन मंत्री, पर्यटन विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए जाने का श्रेय देते हुए कहा कि वे बहुत विचारवान और कर्मठ जनप्रतिनिधि थे। उनके निधन से उत्तराखंड ने अपना एक बहुत ही योग्य, ईमानदार और जनता में लोकप्रिय प्रतिनिधि खो दिया है।
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