नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल में बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार से पूछा है कि परिजनों की शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया, जिससे उन्हें लखनऊ में जीरो एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि 28 अप्रैल तक मामले की जांच रिपोर्ट पेश की जाए।
मामले के अनुसार, लखनऊ निवासी मृतका के पिता राम कृष्ण तोमर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। याचिका में बताया गया कि उनकी 18 वर्षीय बेटी बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और विश्वविद्यालय के छात्रावास में रहती थी। वह नियमित रूप से घर पर बातचीत करती थी।
परिजनों के मुताबिक, छात्रा ने उन्हें बताया था कि कुछ सीनियर छात्र उसके साथ रैगिंग कर रहे हैं, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थी। इसके कुछ समय बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से सूचना दी गई कि उनकी पुत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है।
बताया गया कि छात्रा को अचेत अवस्था में सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मामले की शिकायत भवाली थाने में की, तो पुलिस ने कॉलेज के दबाव में आकर एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद परिजनों को लखनऊ में जीरो एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। लखनऊ पुलिस ने जांच के लिए मामला भवाली थाने को स्थानांतरित किया, लेकिन आरोप है कि अब तक स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि कॉलेज गेट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना भी दिखाई दे रही है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।



