
उत्तरकाशी।
तांबाखाणी सुरंग में हो रहे पानी के रिसाव और धंसने की आशंका ने एक बार फिर से सुरंग निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धि सिंह पवार का आरोप है कि सुरंग निर्माण कार्य के दौरान भारी पैमाने पर घोटाले और घटिया निर्माण हुआ था, जिसकी अनदेखी शासन-प्रशासन ने जानबूझकर की।
बजट 9 करोड़ से 27 करोड़, फिर भी घटिया निर्माण
वर्ष 2014–2016 के दौरान वरुणावत पैकेज अंतर्गत स्वीकृत 9 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर 27 करोड़ रुपये कर दिया गया। तत्कालीन इंजीनियर संजीव जैन पर इस बजट हेरफेर और निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप लगे थे। तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीधर बाबू अद्दांकी ने 27 जून 2024 को इस मामले में सचिव सिंचाई विभाग को कार्यवाही की सिफारिश भी की थी।
80% कमीशनखोरी का आरोप
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इंजीनियर, ठेकेदार और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों ने बजट का 80% कमीशन में हड़पकर घटिया गुणवत्ता का निर्माण कराया। नतीजा आज सबके सामने है—
• सुरंग में लगातार पानी का रिसाव
• धंसने का खतरा
• शहर की सुरक्षा पर गहरा संकट
RTI से हाईकोर्ट तक, पर जांच दबाई गई
भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए इस मामले को RTI से लेकर हाईकोर्ट तक ले जाया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर विजिलेंस जांच भी हुई, लेकिन सरकार के नियंत्रण में काम कर रही विजिलेंस ने कथित तौर पर भ्रष्ट अधिकारियों के ही बयानों पर भरोसा कर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिन अधिकारियों ने ईमानदारी से जांच की कोशिश की, उनका तबादला कर दिया गया।
जनप्रतिनिधियों और जनता की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में केवल अधिकारी और ठेकेदार ही नहीं, बल्कि तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की भी भूमिका संदिग्ध रही। साथ ही, जनता की चुप्पी ने भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।
शहर की सुरक्षा दांव पर
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर घटिया निर्माण वाली यह सुरंग कभी हादसे का कारण बनी, तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और उस समय के जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ जनता की भी होगी।