एनआरआई की जमीन पर कब्जा

Ramesh Kuriyal
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देहरादून। रायपुर क्षेत्र में एक एनआरआई परिवार को भू-माफियाओं और अफसरों की मिलीभगत से भारी नुकसान उठाना पड़ा।
अमेरिका में रह रहे परिवार ने 2014 में वैध रूप से प्लॉट खरीदे, जिन पर न केवल रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज हुई, बल्कि राज्य विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में सीमांकन और विकास कार्य भी होते रहे।
परिवार की ओर से शोभाराम रतूड़ी ने सोमवार को एक प्रेस वार्ता में बताया कि उन्होंने विधिवत रजिस्ट्री करवाई थी। वर्ष 2020 तक बिजली, पानी और सड़क आदि के विकास कार्य चलते रहे।
वर्ष 2020-21 में जब परिवार प्लॉट्स पर निर्माण की स्थिति का जायज़ा लेने पहुँचा, तो देखा कि पूरी प्लॉटिंग पर दीवार खड़ी कर दी गई है और दावा किया जा रहा है कि वह जमीन किसी अन्य व्यक्ति की है।
शिकायत पर पुलिस ने किया केस दर्ज
पीड़ित परिवार द्वारा इस संबंध में 14 जून 2022 को DIG गढ़वाल को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर प्राथमिकी संख्या 95/28/02/23 दर्ज की गई। मामले की जांच रायपुर थाने को सौंपी गई।
जांच अधिकारी द्वारा पीड़ित परिवार से दस्तावेज़ लिए गए, लेकिन आरोप है कि बिना निष्पक्ष जांच के विवेचना अधिकारी ने आरोपियों से साठगांठ कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी और पीड़ितों को ही दोषी ठहराने का प्रयास किया।
इसके बाद पीड़ित परिवार का मामला SIT को सौंपा गया। SIT ने विवेचना अधिकारी की रिपोर्ट को गलत ठहराया और पूरे प्रकरण में जालसाजी की पुष्टि करते हुए आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की।

एनआरआई को झेलनी पड़ी मानसिक पीड़ा, सरकार से लगाई गुहार

पीड़ित परिवार के सदस्य, जो अमेरिका में रहते हैं, जब भारत आए तो प्लॉट पर काम शुरू करने की बजाय उन्हें कानूनी लड़ाई में उलझना पड़ा।
हजारों डॉलर खर्च करने के बाद वे निराश होकर अमेरिका लौट गए। परिवार का कहना है कि यह सोची-समझी साजिश है जिसमें अफसरों की मिलीभगत साफ नजर आ रही है।

पीड़ितों ने 31 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री से भी शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। RTI करने पर भी मामले की जानकारी नहीं दी गई।

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