
दून विश्वविद्यालय के रंगमंच एवं लोक कला प्रदर्शन विभाग द्वारा 21 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस गरिमामय एवं साहित्यिक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गढ़वाली एवं कुमाऊनी जैसी समृद्ध लोकभाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के प्रति जनजागरूकता उत्पन्न करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने अपने संबोधन में कहा, “हमारी लोकभाषाएँ हमारी संस्कृति की जननी हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए हमें सामूहिक रूप से आगे आना होगा, तभी हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त बना पाएँगे।” उन्होंने छात्रों को अपनी मातृभाषा पर गर्व करने और उसे व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर गढ़वाली एवं कुमाऊनी भाषा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने अपनी मातृभाषा में गीत, कविताएँ और विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने अपनी भाषाई और सांस्कृतिक अनुभव साझा करते हुए लोकभाषाओं के महत्व को रेखांकित किया। प्रस्तुतियाँ भावनात्मक, प्रभावशाली और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण रहीं, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम में प्रो. एच.सी. पुरोहित, प्रो. एच. हर्ष डोभाल, प्रो. अजय सिंह, प्रो. चेतना पोखरियाल, श्रीमती ममता पांडे, श्री अनूप सिंह, डॉ. अजीत पंवार, डॉ. कैलाश कंडवाल और डॉ. मानवेंद्रe बर्तवाल सहित अनेक प्राध्यापक एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त राजेश भारद्वाज, सरिता भट्ट, सरिता भावना, अंजेश तथा वैशाली नेगी सहित अनेक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। डॉ. अजीत पंवार एवं डॉ. कैलाश कंडवाल की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।
कार्यक्रम का समापन लोकभाषाओं के संरक्षण के संकल्प के साथ किया गया।




