Ad image

रंगमंच कार्यशाला से विद्यार्थियों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास को मिल रहा विस्तार

Sarthak Prayash Admin
4 Min Read

देहरादून। दून विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय रंगमंच कार्यशाला में विद्यार्थियों ने अभिनय और रंगमंच की बारीकियों को व्यावहारिक रूप से समझा। भारतेंदु नाटक अकादमी, लखनऊ के रंगकर्मी एवं प्रशिक्षक अक्षय मिश्रराम ने विद्यार्थियों को अभिनय, मंचीय प्रस्तुति और रंगमंच की विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। इनमें थिएटर विषय का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के साथ शुभम, अनिता, वैशाली, महक, कनिका और सुमित सहित अन्य छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि रंगमंच कार्यशाला विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रंगमंच के माध्यम से विद्यार्थी अपनी भावनाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के साथ ही सामूहिक रूप से कार्य करना भी सीखते हैं।

विश्वविद्यालय के निदेशक, आईक्यूएसी प्रो. एचसी पुरोहित ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं से विद्यार्थियों को अभिनय के साथ टीमवर्क, अनुशासन और नेतृत्व का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।

‘करके सीखने’ पर रहा जोर

कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना रहा कि रंगमंचीय प्रस्तुति केवल मंच पर अभिनय तक सीमित नहीं है। कथा-वाचन, अभिनेता की तैयारी, दृश्य निर्माण, मंचीय स्थान, समूह-समन्वय और प्रस्तुति की पूरी प्रक्रिया इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

कार्यशाला में सैद्धांतिक जानकारी के बजाय ‘करके सीखने’ की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। विभिन्न रंगमंचीय गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों को शरीर, आवाज, भाव, मंचीय स्थान और सह-अभिनेताओं के प्रति सजग रहने का अभ्यास कराया गया। साथ ही समूह में काम करने और अपनी रचनात्मक ऊर्जा को मंचीय अभिव्यक्ति में बदलने के तरीके भी सिखाए गए।

अभिनेता की तैयारी से लेकर मंचीय प्रस्तुति तक

कार्यशाला का पहला दिन अभिनेता की तैयारी पर केंद्रित रहा। विद्यार्थियों ने आंगिक एवं वाचिक अभिनय, संवाद अदायगी, शारीरिक सजगता और मानसिक एकाग्रता से जुड़े विभिन्न अभ्यास किए। विद्यार्थियों को बताया गया कि अभिनेता के लिए शरीर और आवाज केवल अभिनय के माध्यम नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण उपकरण हैं।

दूसरे दिन प्रदर्शन और प्रदर्शन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों को दृश्य-बिंब तैयार करने, कथा को मंच पर विकसित करने और समूह के साथ मिलकर प्रस्तुति तैयार करने की प्रक्रिया से परिचित कराया गया। इस दौरान डिवाइस थिएटर की अवधारणा और उसके प्रयोगात्मक पक्ष को भी समझाया गया।

प्रशिक्षक अक्षय मिश्रराम ने रंगमंच के मूल तत्वों—पटकथा, अभिनेता और मंच—के आपसी संबंध को समझाते हुए कहा कि प्रभावी प्रस्तुति इन सभी तत्वों के सामंजस्य से तैयार होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को मंच, सह-कलाकारों और ऐन्सेम्बल के प्रति संवेदनशील रहते हुए अपनी सहज रचनात्मक ऊर्जा को प्रभावी मंचीय अभिव्यक्ति में बदलने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, प्रो. आरपी ममगाईं, प्रो. एच. हर्ष डोभाल, प्रो. चेतना पोखरियाल, डॉ. स्वाति बिष्ट, डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. अजीत पंवार और डॉ. कैलाश कंडवाल सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने कार्यशाला को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए उपयोगी पहल बताया।

Share This Article
Leave a Comment