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उत्तराखंड SDRF जल्द अपना सकती है Starlink सैटेलाइट इंटरनेट

Ramesh Kuriyal
3 Min Read

देहरादून: उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) जल्द ही सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक अपनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है। SDRF मुख्यालय जौलीग्रांट की ओर से Starlink सेवा के उपयोग को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शासन से मंजूरी मिलने पर SDRF देश का पहला रेस्क्यू फोर्स बन सकता है, जो सीधे सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करेगा।

दरअसल, उत्तराखंड एक पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य है, जहां भूस्खलन, बादल फटना और बाढ़ जैसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। ऐसे समय में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाती हैं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित होते हैं। वर्तमान में SDRF सैटेलाइट फोन का उपयोग करता है, जिसमें केवल वॉयस कॉल और सीमित मैसेजिंग की सुविधा मिलती है।

लेकिन SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink के जरिए SDRF को हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ वॉइस और डेटा दोनों की सुविधा मिलेगी। इससे जवान अपने मोबाइल डिवाइस पर रियल-टाइम लोकेशन, वीडियो और अन्य जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे राहत और बचाव कार्य अधिक तेज और प्रभावी होंगे।

क्या है सैटेलाइट इंटरनेट?

Starlink एक अत्याधुनिक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में मौजूद हजारों छोटे उपग्रहों के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। यह पारंपरिक केबल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होती, बल्कि सीधे अंतरिक्ष से यूजर तक सिग्नल पहुंचाती है।

कैसे करता है काम?

पृथ्वी से लगभग 500–550 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित सैटेलाइट्स लगातार पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। यूजर के पास एक छोटी डिश एंटीना और वाई-फाई राउटर होता है, जो सिग्नल को सीधे सैटेलाइट तक भेजता है। वहां से डेटा ग्राउंड स्टेशन और फिर इंटरनेट नेटवर्क तक पहुंचता है, और इसी प्रक्रिया से वापस यूजर तक लौटता है।

SDRF को क्या होगा फायदा?

  • दुर्गम और नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट
  • रियल-टाइम डेटा, वीडियो और लोकेशन शेयरिंग
  • रेस्क्यू ऑपरेशन में बेहतर समन्वय
  • चारधाम यात्रा के दौरान निगरानी और सुरक्षा में सुधार

SDRF के सेनानायक अर्पण यदुवंशी के अनुसार, “Starlink सेवाओं के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मंजूरी मिलने पर इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में आपदा और रेस्क्यू कार्यों में काफी मदद मिलेगी और बल की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।”

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