
भारी बारिश के चलते यमुनोत्री हाईवे कई जगहों पर मलबा, बोल्डर और भू-धंसाव से बाधित हो गया है। कुथनौर, सिलाई बैंड, ओजरी, डाबरकोट, जंगलचट्टी, नारदचट्टी और फूलचट्टी में मार्ग बंद पड़ा है। वहीं स्यानाचट्टी में यमुना नदी के मुहाने पर दोबारा मलबा-बोल्डर जमा होने लगे हैं, जिससे कृत्रिम झील बनने की आशंका फिर बढ़ गई है।
तेज़ प्रवाह से खुला था झील का मुहाना
शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद यमुना का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव ने पहले बनी झील का मुहाना तो अपने आप खोल दिया था, लेकिन अब फिर से यहां पानी रुकने लगा है। नदी का बहाव यमुनोत्री हाईवे पर बने पुल से महज़ 3–4 फीट नीचे रह गया है। कुछ होटलों के निचले तल में अब भी पानी भरा हुआ है।
जून में बना था जल संकट
बुधवार को कुपड़ा खड्ड से आए मलबे और बोल्डर ने यमुना का बहाव रोक दिया था। इससे जून माह में बनी झील का जलस्तर अचानक बढ़ा और स्यानाचट्टी के होटल, सरकारी स्कूल और कई घर पानी में डूब गए। देखते ही देखते हाईवे पर बना पुल भी जलमग्न हो गया और पूरा स्यानाचट्टी दो मंजिला इमारतों तक डूब गया। हालात इतने खतरनाक हुए कि लोग भागकर 2–3 किलोमीटर दूर ऊंचे इलाकों में शरण लेने को मजबूर हो गए।
स्थानीय लोगों का आरोप: प्रशासन की लापरवाही
स्यानाचट्टी निवासी जयपाल सिंह रावत, नवदीप और पटमी देवी ने बताया कि यह नुकसान प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है—
“अगर यह घटना रात में होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। दिन का समय होने के कारण लोग समय रहते सतर्क हो गए और अपनी जान बचा पाए। लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है, कुपड़ा खड्ड लगातार डर पैदा कर रहा है।”