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परम्परागत कृषि ज्ञान एवं आधुनिक तकनीक के समन्वय से ही प्रगति संभव : सी डी ओ

Ramesh Kuriyal
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जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशों के क्रम में परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत जनपद के कृषकों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, नवाचारों तथा उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को विकास भवन परिसर से 40 कृषकों के दल को मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह ने हरी झंडी दिखाकर कृषि विज्ञान केन्द्र, चिन्यालीसौड़ के लिए रवाना किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों एवं नवाचारों को अपनाना किसानों की उत्पादकता एवं आय वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परम्परागत कृषि हमारी समृद्ध विरासत एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, जिसे आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।उन्होंने महिला कृषकों को कृषि क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न संभावनाओं एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कृषि विज्ञान केन्द्र चिन्यालीसौड़ में इन 40 कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, मृदा स्वास्थ्य, फसल विविधीकरण, उन्नत बीजों का चयन, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण, कृषि यंत्रीकरण तथा कृषि आधारित नवाचारों सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही कृषकों को वैज्ञानिक विधि से खेती करने की व्यावहारिक जानकारी देकर उत्पादन लागत कम करने एवं कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य जनपद में परम्परागत कृषि ज्ञान एवं आधुनिक तकनीक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए कृषकों को सक्षम बनाना तथा कृषि को अधिक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना है। विशेष रूप से महिला कृषकों की कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उन्हें नवीन तकनीकों एवं कृषि आधारित आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

इस अवसर मुख्य कृषि अधिकारी एसएस वर्मा सहित संबंधित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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