
गैरसैंण।
प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का सन्नाटा एक साल बाद आखिरकार टूट गया है। मंगलवार से भराड़ीसैंण विधानसभा में मानसून सत्र शुरू हो रहा है। इसके साथ ही पहाड़वासियों की उम्मीदें एक बार फिर जवान हो गई हैं कि इस बार सरकार उनके जख्मों पर मरहम लगाएगी।
पिछला मानसून सत्र 21 अगस्त 2024 को गैरसैंण में हुआ था। इसके बाद बजट सत्र राजधानी देहरादून में ही सीमित रहा। नतीजतन, पूरे एक साल से भराड़ीसैंण में सन्नाटा पसरा था। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने मंत्रियों और विधायकों की टीम के साथ गैरसैंण पहुंचे, वहीं विपक्ष भी पूरी तैयारी के साथ मोर्चाबंदी कर चुका है।
इस बार का सत्र और भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि बीते एक साल में उत्तराखंड ने राजनीतिक उठापटक और आपदा—दोनों का सामना किया। गैरसैंण पहुंचने के दौरान टूटी सड़कों और भूस्खलन के जख्म साफ दिखाई दे रहे हैं। जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि सरकार ने इन मुश्किल रास्तों से गुजरकर पहाड़ की असली तकलीफ महसूस की होगी और विधानसभा में इनका हल भी ढूंढेगी।
परीक्षा दे रहा है पहाड़ और सरकार दोनों
मानसून सीजन में बारिश रोजाना पहाड़ की परीक्षा ले रही है। ऐसे में सरकार और उसके अधिकारी भी कठिनाइयों से जूझते हुए गैरसैंण तक पहुंचे। मलबे और भू-स्खलन से जूझती गाड़ियां जब भराड़ीसैंण पहुंचीं तो यह संदेश भी साफ था कि “अगर सरकार में पहाड़ चढ़ने का जुनून है, तो कोई चुनौती असंभव नहीं।”
प्रदेश की जनता अब टकटकी लगाए बैठी है कि इस सत्र से पहाड़ के विकास को नई दिशा और नई गति मिले।