शहीद खड्ग बहादुर बिष्ट का बने स्मारक

Ramesh Kuriyal
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डा अतुल शर्मा

स्वाधीनता सेनानी शहीद खड्ग बहादुर बिष्ट डांडी यात्रा मे शामिल हुए ।नमक कानून तोड़ने के लिये । देहरादून स्थित नून नही मे बहुत से स्वाधीनता सेनानियो ने नमक बनाया था ।
खड्ग बहादुर के जीवन की एक घटना ने उनके जीवन को बदल दिया ।यह उल्लेख भक्तदर्शन जी की पुस्तक गढवाल की दिवंगत विभूतायां मे भी है । स्वाधीनता सेनानी कवि श्री राम शर्मा प्रेम ने उस साप्ताहिक हिंदुस्तान मे इस घटना पर लेख भी लिखा था ।घटना इस प्रकार है कि कलकत्ता के सेठ हीरा लाल ने एक नेपाली राजकुमकरी मैया के साथ अनाचार करने की सोची तो खड्ग बहादुर कलकत्ता पहुचे और अपनी खुखरी से सेठ की गर्दन धड़ से अलग कर दी ।उन्होने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया ।उन्हे सजा हुई । लोगो ने दबाव डाला तो कुछ सजा भुगतने के बाद उन्हे रिहा कर दिया गया ।
वे देहरादून स्थित आठ नम्बर ग्रांट ( अब नेहरुग्राम) के निवासी थे ।यहां से उन्होने गांधी जी को अपने खून से एक पत्र लिखा कि वे डांडी मार्च मे शामिल होना चाहते है पर उन्हे खुखरी चलानी आती है चर्खा चलाना नही आता । गांधी जी ने उन्हे डांडी यात्रा मे शामिल होने के लिये बुला लिया ।तब से स्वाधीनता संग्राम मे कूद पडे़ । बहुत बार जेल गये ।
धरसाने के धावे मे भी उनकी भूमिका रही ।अरुणक आसाफली के साथ भी रहे ।
उनका गौरव शाली इतिहास है । उनका स्मारक बनना चाहिये ।
नेहरुग्राम मे उनके नाम की सड़क है । उनके नाम से फुटबाल टूर्नामेंट भी होता है । इतिहासकारो ने उनपर लिखा है । श्री योगेश धस्माना ने बहुत जगह उल्लेख किया है ।

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