बदरीनाथ/चमोली। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार सुबह सवा छह बजे वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। बैसाख मास शुक्ल पक्ष, पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्ध योग के शुभ संयोग में कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।
कपाट खुलने से पहले ही बुधवार को भगवान उद्धव, तेल कलश और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम पहुंच गई थी, जबकि भगवान कुबेर की डोली रात्रि प्रवास के लिए बामणी गांव में ठहरी।
धाम को इस अवसर पर भव्य रूप से सजाया गया। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के प्राचीन मठ-मंदिरों तक को करीब 25 कुंतल ऑर्किड और गेंदे के फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा क्षेत्र दिव्य आभा से जगमगा उठा।
कपाट खुलने से पहले ही यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। बदरीनाथ धाम में अब तक करीब 550 वाहन पहुंच चुके हैं, जबकि अखंड ज्योति के दर्शन के लिए 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। श्रद्धालु यहां आध्यात्मिक शांति के साथ हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद ले रहे हैं।
कपाट उद्घाटन से पूर्व हुई प्रमुख परंपराएं
- सुबह 4:00 बजे – दक्षिण द्वार से भगवान कुबेर का प्रवेश
- सुबह 4:15 बजे – मंदिर कर्मचारियों की तैनाती
- सुबह 5:30 बजे – रावल, धर्माधिकारी व वेदपाठी उद्धव जी के साथ मंदिर में प्रवेश
- सुबह 5:40 बजे – द्वार पूजन सम्पन्न
- सुबह 6:15 बजे – श्रद्धालुओं के लिए कपाट खुले
- पूर्वाह्न 11:00 बजे – गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना शुरू
कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा ने भी रफ्तार पकड़ ली है और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल है।



