अल्मोड़ा। टिहरी गढ़वाल के लम्बगांव निवासी केतन लाल की हत्या के विरोध में रविवार को गांधी पार्क, अल्मोड़ा में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर दोषियों को शीघ्र कड़ी सजा दिलाने की मांग उठाई।
धरने की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा ने की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि 7 जून 2026 को लम्बगांव, टिहरी के युवक केतन लाल की निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं समाज में बढ़ती असहिष्णुता और प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिणाम हैं।
उपपा के संयोजक पी.सी. तिवारी ने कहा कि केतन हत्याकांड केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और मानवीय गरिमा पर हमला है। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ते अपराध चिंता का विषय हैं और समाज को अमानवीय घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि केतन हत्याकांड कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने वर्ष 2022 में उपपा नेता जगदीश की हत्या समेत अन्य घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंसा के मामलों में निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज में जातीय और लैंगिक भेदभाव की मानसिकता को खत्म करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केतन के साथ मौजूद दिवाकर को भी गंभीर रूप से घायल किया गया, लेकिन उसके उपचार की समुचित व्यवस्था अब तक नहीं की गई है। उन्होंने सरकार से घायल के उपचार का पूरा खर्च वहन करने की मांग की।
धरने को वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा, उपपा की वरिष्ठ नेता आनंदी वर्मा, डॉ. रेनू, मोहम्मद शाकिब, अधिवक्ता जीवन चंद्र, लल्लू लाल, हेम मिश्रा, किरण, भारती पांडे, ममता जोशी और विनीता समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन उपपा महासचिव नारायण राम ने किया।
ये मांगें उठाईं
- केतन हत्याकांड की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर दोषियों को शीघ्र कड़ी सजा दी जाए।
- मृतक के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- घायल दिवाकर के उपचार का पूरा खर्च सरकार वहन करे।
- जगदीश हत्याकांड सहित हिंसा के अन्य मामलों में भी त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
धरने में डॉ. प्रियंवदा, मनोज पंत, हेमा पांडे, विद्या कनवाल, अनीता बजाज, ममता बिष्ट, हीरा देवी, दीपांशु पांडे, हरीश राम, मोहन लाल टम्टा, गोपाल राम और अन्य सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ता तथा छात्र मौजूद रहे।



