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दिहाड़ी मज़दूरों का पंजीकरण नियम के अनुसार हो

Ramesh Kuriyal
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आज शहर भर के निर्माण मज़दूरों की और से पोस्टर हस्ताक्षर अभियान को समाप्त करते हुए मज़दूरों के प्रतिनिधि गांधी पार्क के गेट पर इकट्ठे हुए और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री एवं श्रम मंत्री से मांग की कि नियम के अनुसार दिहाड़ी मज़दूरों का पंजीकरण उनके यूनियन द्वारा कराने की व्यवस्था को बहाल करे। कार्यक्रम में भाग करते हुए प्रतिनिधियों ने कही कि कुछ साल पहले सकारात्मक कदम उठाने के बाद पिछले आठ महीनों से गैर ज़रूरी एवं असंभव शर्तें जैसे सरकारी ठेकेदार द्वारा प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लगा कर दिहाड़ी निर्माण मज़दूरों के पंजीकरण में गंभीर रुकावटें एवं समस्याएं पैदा कर दी गयी है।  इस समय जब पुरे देश में मज़दूर गैस की किल्लत एवं बढ़ती हुई महंगाई की मार झेल रहे हैं उनको अपने क़ानूनी हक़ ज़्यादा ज़रूरी है, लेकिन इस समय अधिकांश मज़दूरों का पंजीकरण ही नहीं हो पा रहा हैं।  ऐसी व्यवस्था बना दी गयी है, जिसमें गैर मज़दूरों का ही पंजीकरण हो पा रहा है।  अगर किसी यूनियन के नाम पर दलाली या योजना का दुरूपयोग हो रहा है, तो उस यूनियन पर कार्यवाही की जाये।  लेकिन सारे यूनियन को प्रक्रिया से बाहर करने से असली  निर्माण मज़दूरों  पंजीकरण असंभव जैसे हो गया है।    वक्ताओं ने सरकार को याद दिलाया कि  दो साल पहले कैग की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आयी थी कि राज्य में पात्र मज़दूरों में से दस प्रतिशत से कम लोग पंजीकृत हैं, और जो लोग पंजीकृत हैं, उनमें से आधे से ज्यादा अपात्र लोग हैं। इस स्थिति को  सुधारने के बजाय उल्टा ऐसे कदमों को उठाया जा रहा हैं जिससे स्थिति और ख़राब हो सकती है। क्योंकि मुख्यमंत्री ही श्रम मंत्री हैं, तो उनसे आगे भी निवेदन किया जायेगा कि सरकार उचित शर्तों को लगा कर यूनियन द्वारा असली निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण कराने की व्यवस्था बहाल करे। आगामी दिनों में सारे क्षेत्रों के पोस्टर मुख्यमंत्री की आवास में पहुँचाया जायेगा।
कार्यक्रम में सुनीता देवी, अशोक कुमार, मुन्ना कुमार, प्रभुत पंडित, रमन पंडित, संजय, पप्पू, अरुण तांती, इंद्रदेव, सुवा लाल, रामु सोनी, रामदास, मनोज, इत्यादि शामिल रहे।

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