महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक, हरियाणा के फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन रिसर्च एंड डवलपमेंट एवम् सेंटर ऑफ आईपीआर स्टडीज के निदेशक प्रो. हरीश दुरेजा ने कहा, आधुनिक चिकित्सा और अनुसंधान में एआई का उपयोग ड्रग डिस्कवरी, प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स और मरीजों की व्यक्तिगत देखभाल में तेजी से बढ़ रहा है। एनईपी- 2020 के तहत डिजिटल परिवर्तन को अपनाकर फार्मेसी स्टुडेंट्स वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और नवाचार के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को समग्र शिक्षा के महत्व को समझाते हुए केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर तकनीकी कौशल विकसित करने की सलाह दी। साथ ही फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया- पीसीआई की ओर से जारी फार्मेसी के नए पाठ्यक्रम और उसमें एआई के अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार से एनईपी- 2020 के लक्ष्य साकार हो सकेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई, भविष्य में एआई स्वास्थ्य देखभाल और समग्र शिक्षा का आधार बनेगी।
प्रो. दुरेजा तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति की छठी वर्षगांठ पर उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की भूमिका पर हुए वेबिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इंस्टिट्यूशन्स इन्नोवेशन काउंसिल-आईआईसी के तत्वावधान में हुए इस वेबिनार का विषय उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- एआईः नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से एनईपी- 2020 को आगे बढ़ाना रहा। वेबिनार में फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल बोले, पाठ्यक्रम में प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश से स्टुडेंट्स वर्तमान परिदृश्य में आने वाली चुनौतियां का ठीक से सामना कर पाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई, ऐसे में नया पाठ्यक्रम छात्रों के लिए बहु उपयोगी सिद्ध साबित होगा। इसमें उप-प्राचार्य प्रो. मयूर पोरवाल ने स्वागत भाषण, जबकि डॉ. आशीष सिंघई ने वोट ऑफ थैंक्स दिया। संचालन सुश्री उर्वशी सक्सेना ने किया।



