देहरादून। रोडवेज की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कभी कुमाऊं का सबसे बड़ा मेजर वर्कशॉप माने जाने वाले इस संस्थान से वर्षों तक हजारों लोगों को रोजगार मिला, लेकिन उत्तराखंड राज्य बनने के बाद इसकी स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई। अब आरोप है कि सरकार रोडवेज व्यवस्था को स्वयं संचालित करने में असमर्थ नजर आ रही है और हिल बस टर्मिनल को निजी क्षेत्र के हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विनोद घड़ियाल ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि हिल बस टर्मिनल की 12 दुकानों में से कम से कम दो दुकानें राज्य आंदोलनकारियों के लिए आरक्षित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया और हिल बस टर्मिनल को निजी क्षेत्र को सौंपने का प्रयास किया गया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को लेकर जन आंदोलन शुरू किया जा सकता है। घड़ियाल ने उत्तराखंड सरकार से मांग की कि हिल बस टर्मिनल को निजी हाथों में देने की योजना तत्काल निरस्त की जाए और इसका संचालन स्वयं सरकार उत्तराखंड परिवहन निगम की देखरेख में करे।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर बस टर्मिनल का संचालन होने से न केवल परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे। सरकार को निजीकरण के बजाय रोडवेज की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।



