बड़ी खबर : लंबगांव बाजार पर संकट, हटेगा अतिक्रमण

Ramesh Kuriyal
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प्रताप नगर के प्रमुख बाजार लंबगांव पर संकट के बादल गहरा रहे हैं। इसकी वजह प्रशासन की ओर से दिया गया का नोटिस है । जिसमें लोगों से अवैध अतिक्रमण हटाने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर सरकार ने वहां बुलडोजर चलाने की चेतावनी दी है। ऐसे में लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति है। मालूम हो कि लंबगांव बाजार का अधिकांश हिस्सा सरकारी जमीन पर है। ऐसे में यदि वहां बुलडोजर चलता है तो सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो जाएगी। साथ ही क्षेत्र की हजारों जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा ऐसे में लमगांव के व्यापारियों ने लंबगांव बचाओ आंदोलन खड़ा करने का निर्णय लिया है।


लंबगांव 1947 में एक छोटा सा बाजार था। बाद में यहां इंटर कॉलेज बनने के बाद विकास ने रफ्तार पकड़ी और यह क्षेत्र का प्रमुख बाजार बन गया। यहां की बढ़ती आबादी को देखते हुए सरकार ने लंबगांव को नगर पंचायत घोषित कर दिया। अब सरकार को लग रहा है कि यहां यह अतिक्रमण कर लोगों ने अपने बहुमंजिला मकान बना दिया है। राज्य आंदोलनकारी देवी सिंह पवार एवं व्यापार मंडल के अध्यक्ष पूर्व सैनिक युद्धवीर सिंह राणा के नेतृत्व में लंबगांव बाजार के लोगों ने तहसीलदार के प्रतिनिधि कानून को मांग पत्र सौंप कर अपना निर्णय वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह क्षेत्र का प्रमुख बाजार है जिस पर क्षेत्र की जनता निर्भर है। साथ ही यहां जिन्होंने अपने मकान और दुकानें बनाई है उनके ऊपर भी रोजी रोटी का संकट छा जाएगा उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाकर बुलडोजर लगाने के बजाय सरकार को इस भूमि को लोगों के नाम कर देनी चाहिए। व्यापारियों ने और स्थानीय लोगों ने कहा कि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया तो क्षेत्र में बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
कानूनगो जेलसा को ज्ञापन देने वालों में कुशाल सिंह रावत, तिलोक सिंह बिष्ट, डॉक्टर जगदीश रावत, श्रीजीवन पवार, चतर सिंह, आशीष रावत, सुरेश चंद रमोला, वसंत चौहान सिंह चौहान, आशीष पवार, दर्शन सिंह पोखरियाल, केदार सिंह बिष्ट, सुरेंद्र रावत, अर्जुन सिंह बिष्ट, विकास रामगढ़, धनराज पवार, अजय कलूड़ा, सोबत सिंह रावत, प्रमोद पवार, शिव प्रकाश कुकरेती, परमवीर चौहान, कैलाश पवार, आशीष पवार, दीपक कंडियाल, दलवीर सिंह बिष्ट, हुकम सिंह, चंद्रभानु बगियाल, पंकज रावत, रवि कंडियाल, जीतराम आदि शामिल थे। लोगों ने कहा कि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया तो व्यापारी बड़ा आंदोलन करेंगे। इसके लिए बाकायदा संघर्ष समिति का गठन भी किया गया है।

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