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चारधाम यात्रा से 700 करोड़ की आर्थिकी, इस बार वीआईपी मूवमेंट पर रोक

Ramesh Kuriyal
3 Min Read

देहरादून। चारधाम यात्रा न सिर्फ सनातन संस्कृति का दिव्य उत्सव है, बल्कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी बनी हुई है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु जहां आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति करते हैं, वहीं प्रदेश की आर्थिकी को भी मजबूती देते हैं।

सोमवार को आयोजित एक राज्यस्तरीय अकादमिक विमर्श में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि पिछले वर्ष बदरी-केदार समेत अन्य धामों की यात्रा से करीब 700 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुविधा है और इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

द्विवेदी ने बताया कि यात्रा के शुरुआती दिनों में भीड़ अधिक होने के कारण वीआईपी मूवमेंट पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि आम यात्रियों को परेशानी न हो। इस बार बदरी-केदार धाम में विशेष पूजाएं दोपहर के बजाय रात में संपन्न कराई जाएंगी, जिससे अधिक श्रद्धालु पूजा करा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले यात्रा काफी कठिन थी, लेकिन अब ऑल वेदर रोड, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर और बेहतर एयर कनेक्टिविटी के चलते यात्रा सुगम हो गई है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां 11 दुर्गम स्थानों तक हवाई संपर्क स्थापित किया गया है। वहीं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा और सुरक्षित हो जाएगी।

मंदिर समिति अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि चारधाम में गर्भगृह और मंदिर परिसर के आसपास गैर-सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा, जो आदि शंकराचार्य की परंपरा के अनुरूप है। हालांकि, यदि किसी गैर-सनातनी की सनातन में आस्था है, तो वह शपथ पत्र देकर दर्शन कर सकता है।

यात्रा को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए ‘लोकल फॉर वोकल’ पर जोर दिया जा रहा है। धामों में प्रसाद स्थानीय उत्पादों से तैयार किया जा रहा है और यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में होमस्टे संचालित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ रही है।

इस बार स्वच्छ और हरित चारधाम यात्रा का संकल्प भी लिया गया है। इसके तहत यात्रियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

द्विवेदी ने बताया कि मंदिर परिसर के आसपास मोबाइल फोन और कैमरा ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। इसके लिए लाकर रूम की व्यवस्था की गई है।

हेली सेवा के नाम पर हो रही साइबर ठगी से बचने के लिए यात्रियों को केवल अधिकृत वेबसाइट से ही टिकट बुक कराने की सलाह दी गई है। ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने को कहा गया है।

आपदा की स्थिति में मंदिर समिति अपनी 27 धर्मशालाओं में यात्रियों के लिए निशुल्क भोजन और ठहरने की व्यवस्था करती है। साथ ही स्थानीय लोग और स्वयंसेवी संस्थाएं भी सेवा में सहयोग करते हैं।

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