जनपक्षीय विकास के लिए हज़ारों हस्ताक्षरों के साथ मानव श्रृंखला

आज दून समग्र विकास अभियान के बैनर तले शहर भर के लोग , विभिन्न जन संगठन, पर्यावरणवादी संगठन एवं विपक्षी दल देहरादून के गाँधी पार्क पर जनता की आवाज़ के नाम पर बैनर हाथ में थामते मानव श्रृंखला बना कर आवाज़ उठाया कि जनपक्षीय विकास चाहिए, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड नहीं। देहरादून शहर के अनेक जगहों में जन सभाएं आयोजित की गयी थी और उन जन सभाओं में सहमति बनी कि इसविनाशकारी, गैर ज़रूरी परियोजना पर 6200 करोड़ खर्च करने के बजाय, शहर में 400 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों को चलाने से, महिलाओं को बस टिकट फ्री करने से, मज़दूरों के लिए शहरी रोज़गार गारंटी योजना चलाने और उसके द्वारा किफायती घरों को बनाने से, और शहर में निजी स्कूल, मॉल, एवं सिग्नल और चौकों पर सही व्यवस्था बनाने से जनता को भी राहत मिल पायेगी और ट्रैफिक की समस्या का हल भी हो सकता है। यह सारे काम अगले पांच से दस साल तक हो सकता है जिसपर खर्चा 6200 करोड़ से कम होगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि “जन सुनवाई” के नाम पर सरकार की और से इस बीच आयोजित कार्यक्रम में ब्रह्म फ़ैलाने की कोशिश की गयी कि इस प्रस्तावित परियोजना को बनना ही है, लेकिन सरकार को प्रभावित लोगों और इस शहर की जनता को कुछ बताने कि ज़रूरत नहीं है। यह जनता को डराने और धमकाने की कोशिश थी और उच्च न्यायलय ने इसको रद्द कर दी, यह सराहनीय है। हाल में अनुपूरक बजट में इस परियोजना के लिए 925 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो स्वास्थ इंफ्रास्ट्रक्चर या शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर पर आवंटित धनराशि से कई गुना ज़्यादा है। यह न सिर्फ देहरादून की बल्कि उत्तराखंड की जनता के साथ धोखा है और इससे इस सरकार की चरित्रत भी सामने आती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग उठायी कि इस प्रस्तावित परियोजना को रद्द किया जाये और जनपक्षीय विकास पर कदम तुरंत उठाया जाये।
कार्यक्रम में उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ SN सचान, उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट, डॉ NNपांडेय, राघवेंद्र, मैड के विवेक और आरती, सर्वोदय मंडल के हरबीर सिंह कुशवाहा, और चेतना आंदोलन के राजेंद्र शाह, शंकर गोपाल, अशोक कुमार, सुनीता देवी, मुमताज देवी, जनतुल देवी, रमन पंडित, इरफान, मुन्ना, अरुण तांती, इत्यादि शामिल रहे।