Ad image

बस्तियों को गैर-कानूनी तरीके से हटाने के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाई जाए

Sarthak Prayash Admin
3 Min Read

देहरादून। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र व ‘साहस फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में बृहस्पतिवार को ‘ग्राउंड रियलिटीज’ विषय पर एक विचारोत्तेजक सार्वजनिक संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों, शोधार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक सुर में कहा कि नीतियां कागजों में नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और स्थानीय ज्ञान को केंद्र में रखकर बनाई जानी चाहिए।

संवाद की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक उद्यमी शहाब नक़वी ने कहा कि जब विकास की योजनाएं ऊपर से नीचे (Top-down approach) की ओर लागू की जाती हैं, तो उनके अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते। उत्तर भारत और गढ़वाल हिमालय के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने ग्रामीण आजीविका, पारंपरिक कृषि और दिव्यांगजनों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।

पारंपरिक कृषि में बदलाव पर चिंता नक़वी ने रासायनिक आधारित एकल फसल व्यवस्था और देशज बीजों की घटती स्वायत्तता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक अनाज और local बीज केवल खेती का हिस्सा नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन का मुख्य आधार हैं। रासायनिक खेती के दबाव से छोटे किसान आर्थिक संकट में आ रहे हैं।

पलायन और ग्रामीण श्रम की चुनौतियां सत्र के दौरान ‘पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे’ और नीति आयोग के ‘मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जारी पलायन पर मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि रोजगार के अभाव में युवा गांव छोड़ रहे हैं। इसके लिए स्थानीय भूगोल, हुनर और संसाधनों को आजीविका से जोड़ने वाली विशेष नीतियों की दरकार है।

दिव्यांगजनों को दान नहीं, अवसर चाहिए दिव्यांगता के मुद्दे पर शहाब नक़वी ने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल सहायता या दान के नजरिए से देखना बंद करना होगा। उन्हें सुलभ वातावरण, उपयोगी उपकरण, तकनीकी प्रशिक्षण और सम्मानजनक रोजगार देने की जरूरत है।

सवाल-जवाब सत्र में उभरे अहम बिंदु खुले संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने स्थानीय बीजों, कारीगरों की स्थिति, और सरकारी योजनाओं की जमीनी उपयोगिता पर कई तीखे सवाल पूछे। नक़वी ने स्पष्ट किया कि किसी भी विकास नीति की असली सफलता का मापदंड दस्तावेजों में नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में आए बदलाव से तय होता है।

इस दौरान दून पुस्तकालय के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी, पुस्तकालयाध्यक्ष डी.के. पांडेय, सुंदर सिंह बिष्ट सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी, शिक्षाविद व गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Share This Article
Leave a Comment