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टिहरी मेडिकल कॉलेज नहीं, झूठ का पुलिंदा लेकर जनता के बीच जा रहे हैं किशोर उपाध्याय : राकेश राणा

Ramesh Kuriyal
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15 साल के कार्यकाल का हिसाब देने के बजाय पुरानी घोषणाओं को अपनी उपलब्धि बताकर जनता को गुमराह कर रहे विधायक।

नई टिहरी। टिहरी मेडिकल कॉलेज को लेकर टिहरी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगभग 15 वर्षों से विधायक रहने के बावजूद किशोर उपाध्याय के पास 2027 में जनता के बीच जाने के लिए अपनी कोई ठोस उपलब्धि नहीं है। इसलिए अब वे पुरानी घोषणाओं और दूसरे लोगों के प्रयासों को अपनी उपलब्धि बताकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

राणा ने कहा कि टिहरी मेडिकल कॉलेज के नाम पर किशोर उपाध्याय जिस तरह के दावे कर रहे हैं, वह उपलब्धियों का पुलिंदा नहीं बल्कि झूठ और भ्रम का पुलिंदा है। यदि वास्तव में मेडिकल कॉलेज की घोषणा वर्ष 2006 में हुई थी तो उसके बाद इतने वर्षों तक इसे धरातल पर लाने के लिए क्या किया गया? जनता को सिर्फ घोषणा की तारीख नहीं, बल्कि उसके बाद की पूरी कार्यवाही और अपनी भूमिका का हिसाब चाहिए।

नारायण दत्त तिवारी सरकार के समय जनता को गुमराह करने का आरोप

राकेश राणा ने कहा कि जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी जी के नेतृत्व में सरकार थी, उस समय भी किशोर उपाध्याय ने टिहरी की जनता को गुमराह किया और अपनी ही सरकार के खिलाफ महापंचायतें आयोजित कीं। राणा ने कहा कि जनता को यह भी याद रखना चाहिए कि उस दौर में किशोर उपाध्याय की भूमिका क्या थी और उन्होंने टिहरी के हितों के लिए क्या किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा, जहां टिहरी बांध से जुड़े पुनर्वास के मामलों को लेकर एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में व्यवस्था की गई। राणा ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का टिहरी के लोगों के हितों पर गंभीर प्रभाव पड़ा और पुनर्वास से जुड़े मामलों में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

राणा ने कहा कि अगर किशोर उपाध्याय स्वयं को टिहरी का सबसे बड़ा हितैषी बताते हैं तो उन्हें इस पूरे प्रकरण पर भी जनता के सामने अपना पक्ष और अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।

चांटीडोबरा पुल से लेकर टिहरी बांध के पुलों तक—हर काम का श्रेय लेने की राजनीति

राकेश राणा ने कहा कि चांटी डोबरा पुल हो या टिहरी बांध क्षेत्र में बने अन्य पुल, किशोर उपाध्याय आज हर विकास कार्य को अपनी उपलब्धि बताने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “जिन परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण और क्रियान्वयन में इनका दूर-दूर तक कोई प्रत्यक्ष वास्ता और सरोकार नहीं रहा, उनका श्रेय लेने की राजनीति बंद होनी चाहिए। जनता सब जानती है कि किसने प्रस्ताव रखा, किसने धन स्वीकृत कराया और किसने धरातल पर काम करवाया।”

राणा ने कहा कि विकास कार्य किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होते। जनता के पैसे से बने पुल, सड़कें और संस्थान पूरे क्षेत्र की संपत्ति हैं। हर विकास कार्य पर अपना नाम चिपकाकर उसे व्यक्तिगत उपलब्धि बताना जनता के साथ छल है।

हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग कॉलेज की उपलब्धि भी अपनी बताने पर सवाल

राणा ने भागीरथीपुरम स्थित हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग कॉलेज को लेकर भी किशोर उपाध्याय के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना में तत्कालीन सांसद विजय बहुगुणा और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

उन्होंने कहा कि यदि इतिहास को जनता के सामने रखा जाए तो यह साफ हो जाएगा कि किसने क्या भूमिका निभाई। “दूसरों के प्रयासों का श्रेय लेना उपलब्धि नहीं, बल्कि इतिहास के साथ खिलवाड़ है।”

कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय पर भी जवाब दें

राणा ने कहा कि टिहरी के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण संस्थानों को लेकर भी विधायक को जनता को जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय टिहरी से बाहर चला गया और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से जुड़ा महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर ऋषिकेश की ओर चला गया।

उन्होंने कहा कि यदि किशोर उपाध्याय वास्तव में टिहरी के इतने बड़े हितैषी हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि इन संस्थानों को टिहरी में मजबूत और सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने क्या ठोस प्रयास किए।

15 साल विधायक रहे, फिर भी विधायक निधि का पूरा उपयोग नहीं कर पाए

राकेश राणा ने कहा कि विधायक को दूसरों की उपलब्धियां गिनाने के बजाय पहले अपनी विधायक निधि और अपने पूरे कार्यकाल का हिसाब जनता को देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “इतने लंबे समय तक विधायक रहने के बावजूद यदि विधायक अपनी विधायक निधि तक पूरी तरह खर्च नहीं कर पाए, तो उन्हें जनता को बताना चाहिए कि विकास की गति इतनी धीमी क्यों रही? कितने काम स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए और कितना धन खर्च हुआ—इसका पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।”

“अब जनता झूठ और श्रेय की राजनीति समझ चुकी है”

राणा ने कहा कि टिहरी की जनता अब बहुत जागरूक है। वह यह भी जानती है कि कौन सा काम किसने कराया और कौन केवल उसका श्रेय लेने के लिए सामने आया।

उन्होंने कहा, “किशोर उपाध्याय की राजनीति अब मुद्दों की राजनीति नहीं, बल्कि झूठे दावों और दूसरों के काम का श्रेय लेने की राजनीति बनकर रह गई है। लेकिन टिहरी की जनता अब सब समझ चुकी है। जनता को बार-बार गुमराह नहीं किया जा सकता।”

राणा ने कहा कि 2027 का चुनाव नजदीक आते ही मेडिकल कॉलेज को लेकर नए-नए दावे सामने आ रहे हैं। उन्होंने विधायक को चुनौती देते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज की घोषणा से लेकर आज तक की पूरी फाइल, शासनादेश, भूमि, बजट, डीपीआर, स्वीकृतियां और अपनी भूमिका का पूरा विवरण जनता के सामने रखें।

उन्होंने कहा कि टिहरी की जनता अब भावनात्मक नारों और राजनीतिक जुमलों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और धरातल पर हुए काम से फैसला करेगी।

राकेश राणा ने कहा—

«“टिहरी की जनता अब झूठ और सच के बीच का फर्क समझ चुकी है। पुल हो, सड़क हो, कॉलेज हो या मेडिकल कॉलेज—हर काम का श्रेय अपने नाम करने से कोई विकास पुरुष नहीं बन जाता। जनता जानती है कि किसने काम किया और कौन सिर्फ श्रेय लेने के लिए सामने आया। 2027 में टिहरी की जनता झूठ की राजनीति का हिसाब जरूर करेगी।”»

 

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