देहरादून। बिजली की मांग और उत्पादन में तय शेड्यूल से होने वाले विचलन के वित्तीय निपटारे के नियम अब नए सिरे से तय हो सकते हैं। इसका असर बिजली खरीद की लागत और आगे चलकर उपभोक्ताओं के टैरिफ पर भी पड़ सकता है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने इस संबंध में विनियम-2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। पर्याप्त संख्या में सुझाव और आपत्तियां नहीं मिलने के कारण आयोग ने ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 28 सितंबर कर दी है। पहले अंतिम तारीख 17 सितंबर निर्धारित की गई थी।
ग्रिड संतुलन के लिए करनी पड़ती है अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था
बिजली उत्पादन या खरीद में तय शेड्यूल से अंतर होने पर उसका वित्तीय निपटारा किया जाता है। मांग और उपलब्धता में अचानक अंतर आने पर ग्रिड को संतुलित रखने के लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करनी पड़ती है। इससे बिजली व्यवस्था की लागत बढ़ सकती है।
प्रस्तावित नए नियमों में बिजली उत्पादन, खरीद और मांग में होने वाले विचलन से जुड़े वित्तीय दायित्वों को निर्धारित किया जाएगा। शेड्यूलिंग में सुधार और ग्रिड अनुशासन बेहतर होने से अनावश्यक रूप से महंगी बिजली खरीद की जरूरत कम हो सकती है। वहीं, विचलन के कारण अतिरिक्त लागत बढ़ने पर इसका असर बिजली खरीद खर्च पर पड़ सकता है।
28 सितंबर तक दे सकेंगे सुझाव और आपत्तियां
विद्युत अधिनियम की धारा 181 के तहत तैयार किए गए इस ड्राफ्ट पर बिजली कंपनियां, बिजली उत्पादक और अन्य संबंधित पक्ष 28 सितंबर तक अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकते हैं। सुझाव और आपत्तियां डाक, ई-मेल या व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती हैं।



