देहरादून:
बहुचर्चित पुष्पांजलि बिल्डर प्रकरण में वर्षों से दबे सवाल एक बार फिर सतह पर आ गए हैं। फरार चल रहे बिल्डर दीपक मित्तल के 45 मिनट लंबे वीडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। वीडियो में मित्तल ने अपने पूर्व कारोबारी साझीदार राजपाल वालिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित साजिश बताया है।
हालांकि यह वीडियो पुराना बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग अहम मानी जा रही है, क्योंकि हाल ही में इस मामले में मित्तल की पत्नी राखी मित्तल की दुबई में गिरफ्तारी हुई है। इसके बाद से ही प्रकरण फिर चर्चा में आ गया है।
वीडियो में मित्तल का दावा है कि शुरुआत में कारोबार साझेदारी के आधार पर संचालित हुआ, लेकिन जैसे ही परियोजना आर्थिक संकट में फंसी, परिस्थितियां बदल गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में साझीदार ने अलग होने के लिए 25 करोड़ रुपये की मांग रखी। रकम नहीं मिलने पर निवेशकों के बीच असंतोष को बढ़ावा दिया गया और पूरा दबाव एकतरफा उनके ऊपर केंद्रित कर दिया गया।
मित्तल ने वीडियो में देहरादून न्यायालय में पंजीकृत एक कथित विधिक समझौते का जिक्र भी किया है। उनके अनुसार, इसमें यह शर्त रखी गई थी कि यदि वह अपनी परियोजना और जमीन दूसरे पक्ष के नाम कर दें तो उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को समाप्त कराने में मदद की जाएगी और भारत वापसी का रास्ता आसान बनाया जाएगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कारोबारी मतभेद को योजनाबद्ध तरीके से कानूनी संकट में बदला गया। प्रभावशाली संपर्कों का इस्तेमाल कर ऐसा माहौल तैयार किया गया, जिससे परियोजना पर नियंत्रण बदला जा सके।
एलओसी के कारण वापसी नहीं कर सके
वीडियो में मित्तल ने बताया कि वह फरवरी 2020 में पत्नी के साथ दुबई गए थे, जबकि उनके बच्चे देहरादून में ही थे। मार्च में कोरोना महामारी के बाद अप्रैल में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया गया। ऐसे में उनकी भारत वापसी संभव नहीं हो सकी।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2022 में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वह देहरादून आए और समझौते के तहत अपनी व पत्नी की संपत्तियां गिफ्ट डीड और शेयर के रूप में दूसरे पक्ष को सौंप दीं। इसके बावजूद समझौते का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते वह अब भी दुबई में रह रहे हैं।
निवेशकों की बढ़ी बेचैनी
वीडियो सामने आने के बाद निवेशकों के बीच एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। वर्षों से फंसी पूंजी को लेकर चिंतित निवेशक अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्पष्ट होना चाहिए कि परियोजना के ठप होने के पीछे असली जिम्मेदारी किसकी है।
वहीं, जांच एजेंसियां भी अब वीडियो में लगाए गए आरोपों और दिखाए गए दस्तावेजों के आधार पर मामले के नए पहलुओं की जांच में जुट गई हैं।



