उत्तराखंड के अलग-अलग ट्रेकिंग क्षेत्रों से लापता हुए तीन पर्यटकों का रहस्य समय के साथ और गहराता जा रहा है। दयारा बुग्याल से बबीता पांडे, पिंडारी ट्रेक से अभिषेक चौहान तथा फूलों की घाटी से हरियाणा निवासी गब्बर सिंह की तलाश में वन विभाग, आईटीबीपी, पुलिस, एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) की टीमें पिछले करीब एक माह से लगातार अभियान चला रही हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। ऐसे में इन गुमशुदगियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी जन्म लेने लगी हैं। हालांकि प्रशासन अंधविश्वास और लोककथाओं से जुड़ी बातों को सिरे से खारिज कर रहा है, लेकिन इन घटनाओं से जुड़े कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार सामने आ रही तीन गुमशुदगी की घटनाओं ने प्रशासन, राहत एजेंसियों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दयारा बुग्याल, पिंडारी ग्लेशियर और फूलों की घाटी जैसे प्रसिद्ध ट्रेकिंग स्थलों से तीन अलग-अलग लोग रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए हैं। कई सप्ताह बीतने के बावजूद उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है।पहला मामला उत्तरकाशी जिले के दयारा बुग्याल का है। 29 मई को उत्तराखंड निवासी बबीता पांडे ट्रेकिंग के लिए यहां पहुंचीं, लेकिन इसके बाद उनका संपर्क टूट गया। पुलिस, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय लोगों की मदद से लगातार खोज अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन 22 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल पाया।दूसरा मामला बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक का है। नोएडा निवासी और पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान 29 मई को ट्रेकिंग के लिए निकले थे। इसके बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और उनसे संपर्क नहीं हो सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें लगातार तलाश में जुटी हैं। अभिषेक के परिजन भी मौके पर मौजूद हैं और उनकी तलाश जारी है।तीसरी घटना चमोली जिले की विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी की है। हरियाणा निवासी गब्बर सिंह 9 जून को ट्रेकिंग के दौरान लापता हो गए। पुलिस, वन विभाग और स्थानीय टीमें लगातार खोज अभियान चला रही हैं। आसपास के क्षेत्रों में भी जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। इन तीनों मामलों में कई समानताएं सामने आ रही हैं। तीनों लोग ट्रेकिंग के दौरान ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों से लापता हुए। तीनों स्थानों पर मौसम तेजी से बदलता है और मोबाइल नेटवर्क भी सीमित रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि लंबे समय बाद भी किसी मामले में कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलना, घना कोहरा, बारिश, फिसलन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां कई बार अनुभवी ट्रेकर्स के लिए भी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे हालात में रास्ता भटकने या दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि तीन अलग-अलग घटनाओं में इतने लंबे समय तक कोई सुराग न मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।इन घटनाओं के बाद पर्वतीय क्षेत्रों की पुरानी लोककथाएं भी चर्चा में हैं। कुछ ग्रामीण इन गुमशुदगियों को रहस्यमयी शक्तियों और स्थानीय मान्यताओं से जोड़ रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने ऐसे दावों को खारिज करते हुए कहा है कि यह केवल लोकविश्वास हैं और वास्तविक चुनौती कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हैं।फिलहाल तीनों मामलों में पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों का खोज अभियान लगातार जारी है। परिवारों को अब भी अपने प्रियजनों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद है। वहीं, इन तीनों गुमशुदगियों ने उत्तराखंड के ट्रेकिंग मार्गों की सुरक्षा और बचाव व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सार्थक प्रयास ब्यूरो



