
देहरादून। उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। राज्य कैबिनेट ने वित्त विहीन सेवाओं को जोड़कर चयन व प्रोन्नत वेतनमान देने के मामले में उप समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट के इस फैसले के तहत गठित होने वाली उप समिति न्यायालय के पूर्व निर्णयों का अध्ययन करेगी और उसके आधार पर सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद ही इस मामले में आगे निर्णय लिया जाएगा।
लंबे समय से उठ रही थी मांग
अशासकीय माध्यमिक और जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षक लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि उनकी वित्त विहीन सेवाओं को जोड़कर चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए। इस संबंध में कुछ शिक्षक पहले ही न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं।
अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री महादेव मैठाणी के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद कुछ शिक्षकों को लाभ मिला, लेकिन कई अब भी इससे वंचित हैं।
सभी शिक्षकों को लाभ देने की मांग
संघ का कहना है कि सभी पात्र शिक्षकों की वित्त विहीन सेवाओं को जोड़कर उन्हें समान रूप से चयन और प्रोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाए। साथ ही, वर्षों से तदर्थ रूप से कार्यरत शिक्षकों को नियमित करने की भी मांग की जा रही है।
इसके अलावा, मानदेय प्राप्त पीटीए शिक्षकों को तदर्थ नियुक्ति में शामिल करने और बिना मानदेय के कार्यरत शिक्षकों को मानदेय श्रेणी में लाने की मांग भी संगठन ने उठाई है।
अब उप समिति की रिपोर्ट पर ही शिक्षकों को मिलने वाली राहत का रास्ता तय होगा।



