देहरादून। बहुचर्चित अंकित थपलियाल हत्याकांड में 12 वर्षों बाद एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले का मुख्य आरोपी अकरम बुधवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। गुरुवार सुबह जैसे ही यह खबर अंकित के बुजुर्ग माता-पिता को मिली, उनकी आंखों में सुकून और राहत के आंसू छलक उठे।
सितंबर 2014 में नकरौंदा के बालावाला क्षेत्र में अकरम (निवासी शामली) ने अपने पांच साथियों के साथ मिलकर अंकित थपलियाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। आरोपी लूट की वारदात को अंजाम देने के इरादे से घर में घुसे थे। इस दौरान अंकित ने परिवार की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवा दी।
अंकित के पिता सुरेंद्र थपलियाल, जो वर्ष 2015 में सहायक कृषि अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए, ने बताया कि बेटे को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। सितंबर 2016 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से मामला नैनीताल हाईकोर्ट भेजे जाने की बात कहे जाने पर उनकी उम्मीदें टूट गईं। निराशा में उन्होंने केस से जुड़े दस्तावेज तक फाड़ दिए थे। अब आरोपी के एनकाउंटर में मारे जाने से उन्हें कुछ हद तक मानसिक शांति मिली है।
मां बोलीं— बाकी आरोपियों को भी मिले सजा
अंकित की मां अंजनी ने बेटे की तस्वीर हाथ में लेकर भावुक होते हुए कहा कि अभी पांच अन्य हत्यारों को सजा मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा कि जिस बेरहमी से उनके इकलौते बेटे की हत्या की गई, उसी तरह अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि घटना के बाद वे गहरे सदमे में आ गई थीं और लंबे समय तक बेटियों के पास बंगलूरू, मुंबई और न्यूजीलैंड में रहीं। घटना की यादें आज भी उन्हें झकझोर देती हैं और कई बार नींद उड़ जाती है। उस खौफनाक मंजर को भूलने के लिए उन्होंने अपने घर के ऊपर नए कमरे बनवाए, जहां अब वे रह रही हैं।
परिजनों ने पुलिस का जताया आभार
अंकित के माता-पिता ने कहा कि अकरम को उसके कर्मों की सजा मिल गई है और इसके लिए वे देहरादून पुलिस का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने न्यायालय से अपील की है कि बाकी आरोपियों को भी जल्द सजा दिलाई जाए और उन्हें फांसी दी जाए।
अंकित के नाम पर गेट बनाने की मांग
नकरौंदा क्षेत्र के विवेक विहार में रहने वाले स्थानीय लोगों—भारती बिष्ट, सिद्धी कोठारी, हेमलता मिश्रा और सीपी कोठारी—ने मांग उठाई है कि सोसायटी के प्रवेश द्वार का नाम अंकित थपलियाल के नाम पर रखा जाए। उनका कहना है कि अंकित ने अपने परिवार की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाया और अपनी जान कुर्बान कर दी, जिसे हमेशा याद रखा जाना चाहिए।



