पिता के नेत्रदान से पहले हंगामा: गंदे एप्रेन और जंग लगे औजार देख परिजनों ने रोकी प्रक्रिया

Ramesh Kuriyal
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देहरादून। पिता के निधन के गम के बीच एक बेटे ने उनकी आंखें दान कर मानवता की मिसाल पेश करने की कोशिश की, लेकिन लापरवाही के आरोपों के चलते मामला विवाद में बदल गया। परिजनों ने गंदे एप्रेन और जंग लगे औजार देखकर नेत्रदान की प्रक्रिया बीच में ही रुकवा दी और पुलिस को सूचना दे दी।

करनपुर निवासी धीरज भाटिया के अनुसार, उनके पिता हरीश चंद भाटिया का शनिवार को निधन हो गया था। उन्होंने पिता की इच्छा के अनुसार नेत्रदान कराने के लिए एक निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से संपर्क किया। इसके बाद दो पीजी डॉक्टर उनके घर पहुंचे।

चिकित्सकों ने परिजनों से कहा कि प्रक्रिया के दौरान केवल दो लोग ही कमरे में रहेंगे। लेकिन जैसे ही नेत्र निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई, परिजनों को कई खामियां नजर आईं। आरोप है कि डॉक्टरों की टॉर्च ठीक से काम नहीं कर रही थी और उनका एप्रेन बेहद गंदा था। इतना ही नहीं, जिन औजारों का इस्तेमाल किया जा रहा था, उन पर जंग लगी हुई थी।

यह देखकर परिजन भड़क गए और उन्होंने नेत्रदान से साफ इनकार कर दिया। परिजनों का कहना था कि ऐसे उपकरणों से निकाली गई आंखें किसी जरूरतमंद के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। हालांकि डॉक्टरों ने दावा किया कि वे 150 से अधिक मामलों में यह प्रक्रिया कर चुके हैं।

मामले में शक गहराने पर परिजनों ने डालनवाला कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर औजारों को सीज कर लिया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें चेक देने की बात कही, जिससे संदेह और बढ़ गया।

पुलिस जांच में दोनों डॉक्टर सही पाए गए हैं, लेकिन पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने बताया कि शिकायतकर्ता को सीएमओ को भी लिखित शिकायत देने को कहा गया है, ताकि विस्तृत जांच हो सके।

वहीं, सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि मामला अभी संज्ञान में आया है और यदि जांच में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अस्पताल से जवाब तलब किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेत्रदान जैसी संवेदनशील प्रक्रिया विशेषज्ञ की निगरानी में ही होनी चाहिए।


नेत्रदान में लापरवाही के आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ट्रेनी डॉक्टर बिना किसी वरिष्ठ प्रोफेसर की निगरानी के नेत्र निकालने पहुंचे थे। यह भी आशंका जताई गई कि वे केवल अभ्यास के लिए यह प्रक्रिया करने आए थे, जो गंभीर लापरवाही है।


क्या है नेत्रदान की सही प्रक्रिया

नेत्रदान में पूरी आंख नहीं, बल्कि कार्निया (आंख का पारदर्शी हिस्सा) प्रत्यारोपण के लिए लिया जाता है। यह प्रक्रिया अधिकृत आई बैंक और प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा सख्त प्रोटोकॉल के तहत की जाती है।

मृत्यु के चार से छह घंटे के भीतर प्रक्रिया शुरू करना जरूरी होता है। इसके लिए परिजनों की लिखित सहमति ली जाती है और मेडिकल जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होती है।

प्रक्रिया के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए स्टेराइल उपकरणों का इस्तेमाल अनिवार्य होता है। निकाले गए कार्निया को विशेष प्रिजर्वेशन माध्यम में 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है।

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