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मसूरी होमस्टे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत

Ramesh Kuriyal
3 Min Read

देहरादून। मसूरी-धनोल्टी मार्ग स्थित कियाना होमस्टे में 15 जून को नवविवाहिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर परुपुड़ी राधा गायत्री की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आने के बाद जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है।

जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मसूरी राहुल आनंद को जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें 17 जुलाई तक मामले से जुड़े सभी साक्ष्य एकत्र करने और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली से घूमने आए थे दंपती

मृतका परुपुड़ी राधा गायत्री आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम की रहने वाली थीं। वह दिल्ली के किदवई नगर ईस्ट में रहकर गुरुग्राम स्थित एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थीं। उनके पति सोमयाजुला श्रीचरण पुणे की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं। दोनों का विवाह नवंबर 2025 में हुआ था।

पुलिस के अनुसार, दंपती 13 जून को दिल्ली से उत्तराखंड घूमने आए थे। पहले ऋषिकेश में ठहरे और 14 जून की रात मसूरी-धनोल्टी मार्ग स्थित टिपरीधार के कियाना होमस्टे में रुके। 15 जून की सुबह राधा गायत्री कमरे में मृत अवस्था में मिलीं।

पति ने बताई थी यह बात

पति ने पुलिस को बताया था कि रात में दोनों ने शराब पी थी और करीब साढ़े तीन बजे सोने गए थे। सुबह उठने पर पत्नी कमरे के फर्श पर अचेत अवस्था में मिलीं। उनके नाक से खून निकल रहा था। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस की टीम ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जांच के दौरान कमरे से शराब की खाली बोतलें और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी बरामद किए गए थे।

पति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज

मृतका के पिता पी. सुधाकर की शिकायत पर पुलिस ने पति सोमयाजुला श्रीचरण के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। परिजनों का आरोप है कि विवाह के बाद से उनकी बेटी का उत्पीड़न किया जा रहा था और उसकी मौत सामान्य नहीं, बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है।

17 जुलाई तक प्रस्तुत किए जा सकते हैं साक्ष्य

संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से संबंधित कोई तथ्य, दस्तावेज या अन्य साक्ष्य हैं, तो वह 17 जुलाई तक किसी भी कार्यदिवस में उपजिलाधिकारी मसूरी कार्यालय अथवा न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर या लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकता है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और उपलब्ध सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर की जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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