उत्तराखंड राज्य को है सशक्त विश्वसनीय जन सरोकारों से ओतप्रोत राजनीतिक विकल्प की जरूरत

Ramesh Kuriyal
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देहरादून। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने यहां कहा कि राजनीतिक दलों, सरकारों के संरक्षण में चल रही प्राकृतिक संसाधनों, जमीनों, नौकरियों की निर्मम लूट के खिलाफ यदि उत्तराखंड में निर्णायक राजनीतिक संघर्ष शुरू नहीं हो पाया तो उत्तराखंडी अस्मिता को बचाना मुश्किल होगा।
केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पी. सी. तिवारी ने यहां कहा कि उपपा राज्य के लिए इस जीवन और मरण के सवाल पर निर्णायक संघर्ष शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कांग्रेस, भाजपा समेत सत्ता में भागीदार रहे क्षेत्रीय दलों के नेताओं की गलत नीतियों के कारण उत्तराखंड आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक , सांस्कृतिक रूप से तेजी से बर्बादी की ओर बढ़ रहा है।
तिवारी ने कहा कि इन गंभीर स्थितियों से निकलने के लिए राज्य को एक सशक्त विश्वसनीय जन सरोकारों से ओतप्रोत राजनीतिक विकल्प की जरूरत है।  जिसके लिए उपपा गंभीरता से कार्य कर रही है। उपपा अध्यक्ष ने कहा कि उपपा राज्य में एक व्यवस्थित, अनुशासित, प्रतिबद्ध पार्टी के निर्माण के लिए, पूरे राज्य में सांगठनिक मजबूती के लिए   कम से कम चार सम्मेलन, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगी
तिवारी ने कहा कि उत्तराखंड की सरकारो की करतूतों से राज्य में स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी मूलभूत जरूरतों का व्यापारीकरण हो गया है, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन लागू नहीं हो रही है, बेरोजगारी चरम पर है और ठेके की नौकरियों व सेना में भर्ती के लिए अग्निवीर जैसी योजनाओं के कारण युवा वर्ग निराश है। कानून व्यवस्था चौपट है पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली, आवारा जानवरों, बंदरो ने लोगों का जीना हराम कर दिया है। इन सभी समस्याओं को दूर करना उत्तराखंड की सरकार व राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में नहीं है।
उपपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड की जनता भाजपा, कांग्रेस और उनके bhi साथ राज कर चुके क्षेत्रीय दलों को देख चुकी है और हमें विश्वास है कि जनता एक बार उपपा को समर्थन देकर राज्य में राजनीतिक बदलाव की पहल करेगी।
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