उत्तराखंडराजनीति

उत्तरकाशी जिले के तीनों विधायक पहली बार पहुंचे सदन में

2002 के बाद दूसरी बार आई यह स्थिती जब तीनों विधायक नये-नवेले हैं

देहरादून। पांचवी विधानसभा में इस बार उत्तरकाशी जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रों गंगोत्री यमुनोत्री और पुरोला की सीटों पर नये नवेले चहरे देखने को मिले। उत्तराखंड में पहले आम चुनाव में एसा नजार कई जिलों से देखा गया था तब कई नई विधानसभा क्षेत्रों का सृजन होना रहा, उसके बाद सभी जिलों में चुनाव की हार जीत से चहरे अदलते-बदलते रहे लेकिन उत्तरकाशी जिले से इस बार 2002 की जैसी तसवीर दिखाई दी।
2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में गंगोत्री से कांग्रेस के विजयपाल सजवाण ने जीत हासिल की और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तब यमुनोत्री सीट से यूकेडी से प्रीतम पंवार और पुरोला से भाजपा के मालचंद निर्वाचित हुए थे, उसके बाद तीनों ने हार और जीत का स्वाद भी चखा। बाद में प्रीतम सिंह पंवार ने उत्तरकाशी जिले की राजनीति छोड़कर धनौल्टी को अपना कर्म क्षेत्र बनाया और इस बार लगातार दूसरी तथा कुल चौथी बार विधायक बने। गंगोत्री क्षेत्र से विजयपाल सजवाण 2002 और 12 में निर्वाचित हुए थे जबकी भाजपा के गौपाल रावत 2007 और 17 का चुनाव जीते थे, गौपाल रावत की मौत के बाद इस बार भाजपा ने नये चहरे सुरेश चौहान को टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की इसके साथ ही यह मिथक भी बना रहा कि गंगोत्री से जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता है उसकी ही सरकार बनती है, सुरेश चौहान पहली बार विधायक बने हैं।
उत्तरकाशी जिले की दूसरी सीट यमुनोत्री से इस बार निर्दलिय संजय डोभाल ने जीत हासिल की है, वह पहली बार विधायक बने हैं, इस सीट से 2002 और 2012 में प्रीतम पंवार जीते थे जबकी 2007 और 17 में केदार सिंह रावत पहले कांग्रेस और फिर भाजपा के टिकट पर विधायक बने।
पुरोला सीट से भाजपा के ही दुर्गेशलाल ने जीत हासिल की है, वह भी पहली बार विधायक बने हैं। इससे पहले पुरोला सीट से मालचंद दो बार भाजपा के टिकट पर चुने गये जबकी कांग्रेस के राजेश जुवांठा और राजकुमार भी विधायक रहें हैं।
इस बार बजट सत्र में उत्तरकाशी जिले के तीनों सीटों पर विधायक आसीन थे वहां पहली बार विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा बन रहे थे एसे में उनके चहरे पर साफ तौर पर कौतुहल देखा जा रहा था, वह वरिष्ठ विधायकों की बातों पर और उनके हाव भाव पर नजर गड़ाए हुए थे, जिले के तीनों विधायकों के लिये यह किसी नई क्लासरूम में उपस्थित होने जैसा था।

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