
देहरादून। राज्य सरकार ने प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों में 1000 स्टार्टअप स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। यह जानकारी राज्य की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार सरकार युवाओं को ध्यान में रखते हुए स्टार्टअप नीति को आगे बढ़ाने का रोडमैप तैयार कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की निकटता और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने का लाभ उठाते हुए उत्तराखंड को स्टार्टअप के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की योजना है।
सरकार की योजना है कि खाद्य एवं कृषि, यात्रा व पर्यटन, शिक्षा, फार्मास्युटिकल, वेलनेस, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाए। इन क्षेत्रों में काम करने वाले उद्यमों के लिए उत्तराखंड को एक सामरिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
उद्योग और शिक्षण संस्थानों का सहयोग
सरकार उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देगी, ताकि नवाचारों को व्यवसायिक रूप दिया जा सके। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों के विस्तार के लिए पूंजी, बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने में भी सहायता दी जाएगी।
प्रदेश में बढ़ेगी स्टार्टअप संस्कृति
वर्तमान में राज्य में लगभग 1750 पंजीकृत स्टार्टअप हैं। सरकार का मानना है कि अनुकूल नीतियों और प्रोत्साहन के माध्यम से प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और उत्तराखंड को देश के प्रमुख स्टार्टअप हब के रूप में विकसित किया जा सकेगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्टार्टअप नीति के तहत प्रमुख प्रोत्साहन
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नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी और पर्यावरण अनुकूल तकनीक से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहन।
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रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले स्टार्टअप को प्राथमिकता।
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छात्र और महिला उद्यमियों के लिए मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का विकास।
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अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की स्थापना पर विशेष ध्यान।
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योजना के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा।
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पूरे प्रदेश में 30 नए इंक्यूबेशन सेंटर विकसित करने की योजना पर काम किया जाएगा।





