देहरादून। विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में बृहस्पतिवार रात पानी और मलबा आने से हुए हादसे ने एक बार फिर परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब तीन किलोमीटर लंबी सुरंग में यह पहली दुर्घटना नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी सुरंग के भीतर दो लोको ट्रॉलियों की टक्कर हो गई थी, जिसमें कई मजदूर घायल हुए थे।
444 मेगावाट क्षमता वाली इस जलविद्युत परियोजना का करीब 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ऐसे में निर्माणाधीन सुरंग में लगातार हो रही दुर्घटनाएं चिंता बढ़ाने वाली हैं। हादसे के बाद सुरंग के भीतर काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
परियोजना का संचालन कर रही टीएचडीसी ने मौजूदा हादसे को भूगर्भीय आपदा बताया है। परियोजना प्रबंधन के अनुसार, सुरंग के भीतर अचानक पानी और मलबा आने से यह स्थिति बनी। राहत एवं बचाव कार्य के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों को मौके पर लगाया गया है।
हालांकि, हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि सुरंग निर्माण के दौरान संभावित भूगर्भीय जोखिमों का पर्याप्त आकलन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का कितना पालन हो रहा है और दिसंबर 2025 की दुर्घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में किए गए आवश्यक बदलाव वास्तव में लागू किए गए या नहीं।
परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बावजूद सुरंग में दुर्घटनाओं का सिलसिला श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावी निगरानी की जरूरत को रेखांकित करता है। ऐसे में हादसे के कारणों के साथ-साथ भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा उपायों की समीक्षा जरूरी हो गई है।



