विधायकों के प्रस्तावों को हटा कर कुछ चुनिंदा लोगों की योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी उत्तारकाशी ने किसके दवाब में यह किया है जनप्रतिनिधियों से भी कहा कि वो सामने आयें और बतायें कि उनके द्वारा दिए गये जनहित के कितने प्रस्ताव इस जिला योजना में स्वीकृत किए गए हैं और कितने प्रस्ताव स्वीकार हुए और कितने प्रस्तावों को दरकिनार किया गया है? उनका कहना है कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव भी बड़ी संख्या में दरकिनार किए गये हैं तो इससे साफ स्पष्ट होता है कि मामला कैवल किसी एक राजनीतिक दल या विधायक का नहीं है बल्कि पूरी जिला योजना की प्रक्रिया और उसमें अपनाई गई कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यदि सता पक्ष के विधायकों जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को भी नजर अंदाज किया गया है ।
संजय डोभाल ने कहा कि मैं सरकार और जिला प्रशासन से मांग करता हूँ कि जिला योजना की पूरी प्रकिया की निष्पक्ष समीक्षा की जाय प्रत्येक स्वीकृत योजना का प्रस्ताव किस जनप्रतिनिधि द्वारा दिये गये है, उसकी संस्तुति किस स्तर से हुई और उसे किस आधार पर स्वीकृति मिली-इसकी पूरी जनकारी सार्वजनिक की जाय। जनता के पैसे से चलने वाली जिला योजना किसी व्यक्ति, नेता य राजनीतिक समूह की जागीर नहीं हो सकती।
जिला योजना की वर्तमान सूची निरस्त य उसमें जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव को शामिल नहीं किया जाता है तो में जिला मुख्यालय और मंत्री निवास का घेराव कर धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। यह लडाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नही है यह लड़ाई जनता के अधिकार जनप्रतिनिधियों के सम्मान, विकास में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए है।



