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मज़दूरों और गरीबों के साथ सरकार का दोगलापन नहीं चलेगा, आंदोलन का एलान

Ramesh Kuriyal
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आज उत्तरांचल प्रेस क्लब देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्षी दलों एवं जन संगठनों ने बीजेपी सरकार को मलिन बस्तियों के सवाल पर घेरा। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सत्ताधारी पार्टी और उनके प्रत्याशी हर क्षेत्र में जा कर कह रहे हैं कि तीन साल तक बस्तियों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी और नियमितीकरण किया जायेगा, और दूसरी तरफ सरकार को पता है कि 16 दिसंबर को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने बेदखली पर रोक लगाने वाला अध्यादेश को मानने से इंकार करते हुए दसियों हज़ार परिवारों को बेघर करने का आदेश दिया है। यह आदेश विधिविरुद्ध और गैर संवैधानिक है, लेकिन सरकार ने इसके खिलाफ एक भी कदम नहीं उठाया है। लगता है कि सरकार स्वयं अपने एजेंट्स के माध्यम से कोर्टों में विवाद खड़े करवाती है तथा कोर्ट/एनजीटी के समक्ष सरकार जानबूझ कर लचर पैरवी करती है तथा गरीबों की बेदखली के लिए कोर्ट के आदेशों को हथियार बनाना चाहती है। 7 जनवरी को आदेश सार्वजनिक हुआ था, बस्तियों में आतंक फैल रहा है, लेकिन अभी भी मुख्यमंत्री और सारे मंत्री खामोश हैं। इसके अतिरिक्त बेज़रूरत और विनाशकारी “एलिवेटेड रोड” परियोजना पर अभी भी कार्यवाही चल रही है। नवंबर 2016 को लाए गये कानून के बावजूद आठ वर्षों के पश्चात भी इस दिशा में सरकार द्वारा कोई व्यापक सर्वेक्षण न तो कराया गया है, न ही सरकार के पास बस्तियों में निवासरत व्यक्ति एवं परिवारों को, उनके द्वारा घृत क्षेत्र के संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा है। सरकार, शासन, प्रशासन, नगर निगम, एमडीडीए…श्रम कल्याण सब की सामूहिक जिम्मेदारी थी पुनर्वास।

कुल मिला कर ऐसे लग रहा है की सरकार चुनाव होते ही कोर्ट के आदेश के बहाने फिर लोगों को बेघर करने में उतरने वाली है, ताकि वह चंद बिल्डरों एवं कंपनियों को इन परियोजनाओं द्वारा लाभ पहुंचवा पाए। अगर इस प्रयास में वह सफल होते तो आशंका है कि आने वाले दिनों में ऐसे ही तरीकों द्वारा राज्य भर में लोगों को बेघर और बेदखल करने की कोशिश की जाएगी। शहर और राज्य में गरीब लोगों से वोट मांगे जा रहे हैं लेकिन उनके बुनियादी अधिकारों पर हमले भी किये जा रहे हैं।

इसलिए प्रेस वार्ता में शामिल संगठनों एवं दलों ने एलान किया कि कानून द्वारा सरकार सुनिश्चित करे कि किसी को बेघर नहीं किया जायेगा, या उनको हक़ दिया जाये और या तो पुनर्वास किया जाये; NGT के आदेश पर तुरंत क़ानूनी कदम उठा कर रोक लगाए जाये; 2016 का मलिन बस्ती अधिनियम पर युद्धस्तर पर कार्यवाही की जाये; इन मांगों को ले कर अभी से आंदोलन शुरू होगा। आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन न करते हुए आंदोलन किया जायेगा। चुनाव के बाद सार्वजनिक कार्यक्रम भी आयोजित कराये जायेंगे। सरकार का दोगलापन को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

प्रेस वार्ता में CPI के राज्य सचिव अशोक शर्मा; चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल; CITU के जिला सचिव लेखराज और हरी कुमार;समाजवादी पार्टी के महानगर सचिव अतुल शर्मा; उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव नरेश नौडियाल; और सर्वोदय मंडल के Adv हरबीर सिंह कुशवाहा शामिल रहे।

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