उत्तराखंडस्वास्थ्य

एम्स में विश्व गुर्दा दिवस पर सीएमई, विशेषज्ञों ने समझाईं डायलेसिस प्रबंधन की बारीकियां

ऋषिकेश। विश्व गुर्दा दिवस के उपलक्ष्य में एम्स ऋषिकेश में आयोजित सतत मेडिकल शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने डायलेसिस प्रबंधन की बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी। चिकित्सकों ने कहा कि किडनी रोगियों के लिए निर्धारित डायलेसिस सत्र को बीच में छोड़ना खतरनाक हो सकता है, इसलिए मरीजों को नियमित रूप से डायलेसिस करवाना जरूरी है।

किडनी रोगों की डायग्नोस्टिक तकनीकों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के उद्देश्य से नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित सीएमई में विशेषज्ञों ने हेमोडायलेसिस और पेरिटोनियल डायलेसिस के प्रकार, प्रभाव, दुष्प्रभाव और पूरी प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने कहा कि किडनी रोगियों के उपचार में डायलेसिस प्रक्रिया के प्रबंधन में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह जीवन रक्षक प्रक्रिया है और इसके प्रबंधन में कमी रोगी के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

सीएमई को डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वाष्र्णेय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम में हेमोडायलेसिस के लिए बनाए गए फिस्टुला की जगह को साफ रखने और संक्रमण से बचाव के उपायों पर भी जानकारी दी गई। विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने बताया कि डायलेसिस का कोई भी सत्र छोड़ना किडनी रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए मरीजों को नियमित रूप से डायलेसिस कराना चाहिए।

नेफ्रोलॉजी विभाग की डॉ. शेरोन कंडारी, डॉ. दीपेश धूत और डॉ. साहिल गर्ग ने डायलेसिस के बेसिक सिद्धांत, प्रक्रिया के दौरान वॉल्यूम मैनेजमेंट और हेमोडायलेसिस व पेरिटोनियल डायलेसिस की क्लीनिकल भिन्नताओं पर व्याख्यान दिया। साथ ही आईसीयू में भर्ती किडनी रोगियों के फ्लूड मैनेजमेंट के दौरान सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने पर भी जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने पेरिटोनियल डायलेसिस के बारे में भी विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इसमें पेट की अंदरूनी परत का उपयोग कर शरीर के अंदर ही रक्त को फिल्टर किया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज का समय भी कम लगता है और यह उपचार आयुष्मान कार्ड के तहत भी कवर होता है।

कार्यक्रम में डॉ. अंकित अग्रवाल, डॉ. लतिका चावला, डॉ. लोकेश सहित विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य, डॉ. अनिल, डॉ. अभय, डॉ. संदीप, डॉ. रितेश, डॉ. सायन समेत रेजिडेंट्स, नर्सिंग अधिकारी और मेडिकल छात्र मौजूद रहे।

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