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इस मासूम के इलाज के लिएकोल इंडिया ने दिए सोलह करोड़

Ramesh Kuriyal
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कोरबा । दुर्लभ बीमारी से जूझ रही छत्तीसगढ़ में मासूम सृष्टि को जल्द नया जीवन मिलेगा। बच्ची की जान बचाने के लिए उसे 16 करोड़ का इजेक्शन लगेगाञ। कोल इंडिया के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने राशि की स्वीकृति देने के साथ एसईसीएल दीपका प्रबंधन ने सृष्टि रानी के पिता को 16 करोड़ रुपए का डायरेक्टर एम्स नई दिल्ली के नाम का चेक दिया है।जबकि ऐसी हीबीमारी सेजूझ रही देहरादून की मासूम के लिए इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था नहीं होने सेउसने पिछले दिनों दम तोड़ दिया।

एकल रूप में देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी और कोल इण्डिया की सब्सिडीएरी एसईसीएल ने नेक पहल करते हुए अपने एक कोयला कर्मी की दो साल की मासूम बच्ची के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत दी है। एसईसीएल के दीपका कोयला क्षेत्र में कार्यरत ओवरमैन सतीश कुमार रवि की बेटी सृष्टि रानी ‘स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी’ (एसएमए) नामक एक बेहद ही दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त है।

अमूमन छोटे बच्चों में होने वाली इस बीमारी में स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन स्टेम में नर्व सेल की कमी से मांसपेशियां सही तरीके से काम नहीं कर पाती और धीरे-धीरे यह बीमारी प्राणघातक होती चली जाती है. इसका इलाज बेहद ही महंगा है और इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन ‘जोलजेंस्मा’ की कीमत 16 करोड़ रुपए है. अब कोल इंडिया ने बेटी के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।

एसईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी सनीश कुमार ने बताया कि कर्मी को अपनी बच्ची के इलाज के लिए इतनी ऊंची कीमत पर इंजेक्शन खरीद पाना संभव नहीं था. कंपनी ने न सिर्फ अपने परिवार की बेटी की जान बचाने के लिए यह बड़ी पहल की है. एसईसीएल दीपका के माइनिंग जीएम शशांक कुमार देवांगन ने सृष्टि के पिता को 16 करोड़ का चेक सौंपा है. 16 करोड़ रुपए का इंजेक्शन सात संमदर पार से आना है, लेकिन परिवार के सामने इतनी बड़ी रकम जमा कर पाना एक बड़ी चुनौती थी. ऐसे में परिवार और मासूम सृष्टि की थमती सांसों को लोगों की मदद की आस थी. सतीश कुमार रवि के छोटे से परिवार में सब कुछ सही चल रहा था. 22 नवंबर 2019 को सतीश के घर मासूम सृष्टि के जन्म के साथ नई खुशियां आई. लेकिन कुछ महीने बाद ही मानो इस परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग गया। अब कोल इंडिया की ओर से मदद मिलने के बाद आशा की जानी चाहिए किउसेनया जीवन मिल सकेगा।

वहीं देहरादून में भी एक आठमाह की मासूम भी ऐसी ही बीमारी से जूझ रही थी, लेकिन उसके परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि एकत्रित करना नामुमकिन होने से उसनके कुछ समय पहलेदम तोड़ दिया। हालांकि व्यक्तिगत स्तर पर कुछ लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया भी था,लेकिन वह ऊंटके मुंह में जीरा केसमान ही थी।

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