
प्रदेश में व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों की कमी से उत्पन्न समस्याओं को देखते हुए शासन ने बड़ा निर्णय लिया है। अब व्यावसायिक सिलिंडरों का कोटा दोगुना कर दिया गया है। पहले जहां प्रतिदिन 2650 सिलिंडरों का वितरण होता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 5300 कर दिया गया है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सिलिंडरों के वितरण के लिए नई मानक प्रचलन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है। नई व्यवस्था के तहत होम स्टे और स्वयं सहायता समूहों को अब 130 के स्थान पर 260 सिलिंडर प्रतिदिन मिलेंगे। इसके अलावा पेइंग गेस्ट आवासों और औद्योगिक कैंटीनों के लिए 300-300, डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 260, सरकारी गेस्ट हाउसों के लिए 300 सिलिंडर निर्धारित किए गए हैं।
रेस्टोरेंट और ढाबों को सबसे अधिक 2000 सिलिंडर, जबकि होटल एवं रिजॉर्ट को 1500 सिलिंडर प्रतिदिन उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए 380 सिलिंडरों का आवंटन तय किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार पहले निर्धारित 20 प्रतिशत कोटा बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। यह आपूर्ति राज्य में कार्यरत तीन प्रमुख तेल एवं गैस कंपनियों—आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल—की बाजार हिस्सेदारी के अनुसार की जाएगी। कंपनियां संबंधित जिलाधिकारियों को सूचित करते हुए आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार ने भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा बढ़ाने का आश्वासन दिया है, बशर्ते राज्य में पाइपलाइन गैस व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
कमी की वजह:
विभाग ने माना है कि व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडरों की कमी बनी हुई है। इसका मुख्य कारण व्यावसायिक सिलिंडरों में कटौती कर घरेलू गैस की आपूर्ति बढ़ाना रहा है। इसके अलावा पैनिक बुकिंग और लोगों द्वारा सिलिंडर स्टॉक करने की प्रवृत्ति ने भी स्थिति को प्रभावित किया है।



