
इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के तत्वाधान में आयोजित पीजी असेंबली में आधुनिक माइक्रोबायोलाॅजी के विकास पर विस्तृत चर्चा की गयी। एम्स में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्नातकोत्तर छात्रों के लिए व्याख्यान सत्र का आयोजन भी किया गया।
एम्स ऋषिकेश के माइक्रोबायोलाॅजी विभाग और इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलाॅजिस्ट्स (ए.आई.आई.एम) के संयुक्त तत्वाधान में पीजी असेंबली आयोजित की गयी। ’परिवर्तन का इतिहास-आधुनिक माइक्रोबायोलाॅजी का विकास’ विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में सूक्ष्म जीव विज्ञान में एम.डी. कर रहे द्वितीय और तृतीय वर्ष के स्नातकोत्तर छात्र शामिल हुए। कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने नवीनतम निदान तकनीकों से अपडेट रहने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी विभाग के संकायगणों से कहा कि वह ऐसे कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वाले प्रतिनिधियों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करें और उन्हें माइक्रोबायोलाॅजी की अगली पीढ़ी तैयार करने हेतु प्रोत्साहित करें। कार्यक्रम को डीन एकडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी और डीन रिसर्च प्रो. शैलेन्द्र हाण्डू आदि ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि इस कार्यक्रम से अनुभव हासिकल करने के बाद सभी प्रतिभागियों को चाहिए कि वो अपने-अपने केन्द्रों में इसका अभ्यास करें और अनुसंधान कार्यों में सहयोग करते हुए इसे बढ़ावा दें।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में सूक्ष्म जीव विज्ञान के स्नातकोत्तर छात्रों के लिए व्याख्यान सत्र और व्यावहारिक प्रदर्शन भी शामिल थे। आयोजन समिति में सूक्ष्म जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. योगेन्द्र प्रताप मथुरिया, सहायक आचार्य डॉ. सुकृति यादव और डॉ. पी. वी. सौजन्या आदि सदस्यों के अलावा बायोमेरिएक्स कंपनी के प्रतिनिधिगण शामिल थे।