लोक संस्कृति समृद्ध होगी तो समाज भी सवंदेशनशील होगा

Ramesh Kuriyal
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देहरादून। 25 से 30 अक्तूबर तक सास्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली में आयोजित प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके पर कहा गया कि लोक संस्कृति समृद्ध होगी तो समाज भी विकसित एवं सवंदेशनशील होगा।

केन्द्र की अध्य्क्ष डाo हेमलता एसo मोहन ,निदेशक ऋषि कुमार वशिष्ठ ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर समानित किया। उत्तराखंड से मदन मोहन सेमवाल,राजेश चमोली, सोहन लाल गौड़, दलीप कैंतुरा को सम्मानन मिला। इस मौके पर कहा गया कि लाक संस्कृति हमारे सतमाज के उल्लास को प्रकट करता है। इससे हमारे सामाजिक सरोकार दिखते हैं।

लोक संस्कृति हमारे इितिहास को भी सांस्कृतिक रूप सेसंजोते हुएएकपीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तकपहुंचाता हे। मौजूदा दौर में जब पाश्चात्य संस्कृति समाज में बढ़ रही है,तब लोक संस्कृति का संरक्षण जरूरी है, और यह कार्य शिक्षक बखूबी कर सकते हैं। स्कूलों के माध्यम से लोक संस्कृति को संरक्षित एवंप्रोत्साहित किया जा सकता है। लोक संस्कृति समृद्ध होगी तो समाज भी विकसित एवं सवंदेशनशील होगा।

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