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दून मेडिकल कॉलेज मेस घोटाले में बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड लेखाकार निलंबित

Ramesh Kuriyal
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दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) के छात्रों की मेस फीस घोटाले में करीब डेढ़ महीने बाद पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मामले में कथित मास्टरमाइंड रहे लेखाकार को निलंबित कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय की जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की गई।

गौरतलब है कि 14 मई को मेस फीस घोटाले का खुलासा होने के बाद कॉलेज प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि एमबीबीएस 2022, 2023, 2024 और 2025 बैच के छात्रों से मेस शुल्क कॉलेज खाते में जमा कराने के बजाय मेस संचालक ने अपने निजी बैंक खातों में जमा कराया।

आरोप है कि मेस संचालक ने छात्रों को ऐसे क्यूआर कोड उपलब्ध कराए, जिन पर दून मेडिकल कॉलेज का नाम अंकित था। इतना ही नहीं, छात्रों द्वारा कॉलेज के नाम से बनवाए गए डिमांड ड्राफ्ट भी लेखा अनुभाग की मिलीभगत से वापस निकलवाकर रद्द कराए गए और छात्रों को लौटा दिए गए। इसके बाद छात्रों से निजी खातों में भुगतान कराया गया।

मामले के सामने आने के बाद गठित जांच समितियों ने लेखा अनुभाग के कर्मचारियों, छात्रावास वार्डनों और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। शुरुआती जांच के आधार पर लेखा अनुभाग के चार कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया था, जबकि सभी वार्डनों को भी बदल दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने आरोपी लेखाकार को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। बताया जा रहा है कि संबंधित लेखाकार उपनल के माध्यम से सेवाएं दे रहा था। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने उपनल को पत्र लिखकर संबंधित लेखाकार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।

मेस फीस घोटाले में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे अन्य जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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