उत्तराखंड

लोगों को बेघर करने के खिलाफ आंदोलन, 30 मई को जन आक्रोश रैली

समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित की गयी बैठक में राज्य के विभिन्न जन संगठनों के साथ विपक्षी दल के नेताओं ने 30 तारीख को होने वाले प्रदर्शन को समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार की और से लोगों को बेघर करने की प्रक्रिया के खिलाफ हो रहे आंदोलन को और मज़बूत किया जायेगा। बैठक में भागीदारी करते हुए संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार अदालत के आदेशों का बहाना बना कर देहरादून में मज़दूरों को बेघर करना चाह रही है, जबकि यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि सरकार ने पिछले आठ सालों में अपने ही वादों पर कोई काम नहीं किया। जब सरकार को पता है कि मज़दूर सिर्फ और सिर्फ बस्ती में रह सकते हैं, तो इसके लिए व्यवस्था न बना कर बार बार उजाड़ना अत्याचार है। इसके अतिरिक्त इस साल 2018 में लाया गया अधिनियम भी ख़तम हो रहा है, जिसके बाद किसी भी बस्ती को कभी भी उजाड़ा जा सकता है, और इसपर सरकार पूरी तरह से खामोश है। साथ साथ में राज्य में शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी बड़े बिल्डर, निजी कंपनी एवं सरकारी विभागों ने अनेक नदियों और नालियों पर अतिक्रमण किये हैं लेकिन उनपर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। आगामी 30 तारीख तिलाड़ी विद्रोह का वर्षगाठ है जिसको किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है और CITU ट्रेड यूनियन गठबंधन के स्थापना दिवस भी है। इसलिए उस दिन संयुक्त रूप से सिर्फ देहरादून में नहीं बल्कि पुरे राज्य में सरकार की गरीब विरोधी एवं मज़दूर विरोधी नीतियों के खिलाफ कार्यक्रम होंगे। देहरादून में “जन आक्रोश रैली” निकाली जाएगी। इसके साथ साथ मज़दूर बस्तियों में अभियान भी चलाया जायेगा और हस्ताक्षर अभियान को भी कराया जायेगा। बैठक में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ SN सचान, अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य महामंत्री गंगाधर नौटियाल, CITU के राज्य सचिव लेखराज, CPI(M) के अनंत आकाश, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, AITUC के राज्य सचिव अशोक शर्मा, एवं सर्वोदय मंडल के हरबीर सिंह कुशवाहा शामिल रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button