
उत्तराखंड में पीसीएस और लोअर पीसीएस भर्तियां एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गई हैं। शासन स्तर पर विभागों से रिक्त पदों की जानकारी मांगी जा रही है, लेकिन अधिकांश विभाग समय पर सूचना देने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसके चलते शासन अब तक लोक सेवा आयोग को अधियाचन (रिक्विजिशन) भेजने में असमर्थ रहा है।
राज्य लोक सेवा आयोग ने 24 सितंबर 2025 को जारी भर्ती कैलेंडर में 17 मई को लोअर पीसीएस प्री परीक्षा और 5 जुलाई को अपर पीसीएस प्री परीक्षा प्रस्तावित की थी। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया था कि ये परीक्षाएं अधियाचन मिलने के बाद ही आयोजित की जाएंगी। बाद में 3 फरवरी को जारी संशोधित कैलेंडर में 17 मई की परीक्षा हटा दी गई, जिससे अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई।
इधर, 18 मार्च को कार्मिक विभाग ने सभी प्रमुख सचिवों और सचिवों को पत्र भेजकर जल्द से जल्द रिक्त पदों की जानकारी मांगी थी। लेकिन अब तक केवल ग्रामीण निर्माण विभाग और गन्ना विकास विभाग ने ही सूचना उपलब्ध कराई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर, अधीक्षक कारागार और सहायक श्रमायुक्त के एक-एक पद, जबकि ग्राम्य विकास विभाग से खंड विकास अधिकारी के पांच पदों की सूचना मिली है। वहीं, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास और शहरी विकास विभाग द्वारा भेजे गए अधियाचन में त्रुटियां पाई गईं, जिन्हें अभी तक संशोधित नहीं किया गया है।
लोअर पीसीएस भर्ती की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है। अब तक केवल तीन विभागों ने रिक्तियों की जानकारी दी है, जिसमें राजस्व विभाग में नायब तहसीलदार के 13 पद, आबकारी विभाग में 4 पद और पंचायती राज विभाग में कर अधिकारी के 5 पद शामिल हैं।
विभागों की इस सुस्ती के कारण हजारों अभ्यर्थियों का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कार्मिक विभाग इस विकल्प पर विचार कर रहा है कि उपलब्ध पदों के आधार पर ही अधियाचन आयोग को भेज दिया जाए और बाद में पदों का विस्तृत विवरण जोड़ा जाए।
हालांकि, अधियाचन भेजे जाने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है, जिससे परीक्षाओं में और देरी तय मानी जा रही है।



