
अगस्त में आई आपदा के दौरान पानी के साथ बहकर आए मलबे में धराली क्षेत्र में होटल और लोग आठ से दस फीट गहराई तक दबे होने की आशंका है। यह जानकारी एनडीआरएफ द्वारा प्रयोग किए गए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) से मिली है।
एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आर.एस. धपोला के अनुसार, जीपीआर से प्राप्त तस्वीरों में स्पष्ट हुआ है कि मलबे में दबे ढांचे और तत्व मौजूद हैं। इसके आधार पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर रही हैं। अब तक खोज के दौरान दो खच्चरों और एक गाय के शव बरामद हुए हैं।
आपदा प्रभावित क्षेत्र को चार सेक्टर में बांटा गया है, जिनमें दो सेक्टर में एनडीआरएफ और दो में एसडीआरएफ की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं।
बुधवार को मौसम साफ रहने पर सुबह 11 बजे से हेलिकॉप्टर उड़ान भर सके। हालांकि, धराली में संचार सेवा पूरे दिन बाधित रही। राहत कार्य को तेज़ करने के लिए दो चिनूक, एक एमआई और एक एएलएच हेलिकॉप्टर धरासू और चिन्यालीसौड़ में तैनात किए गए हैं।
आपदा के कारणों के अध्ययन के लिए शासन द्वारा गठित विशेषज्ञ टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना ने बुधवार को भी व्यापक स्तर पर खोज और रेस्क्यू अभियान चलाया, जिसमें कई जगह मैन्युअल खुदाई भी की गई।
आईटीबीपी की टीम ने धराली में क्षतिग्रस्त एक घर से दो खच्चरों के शव निकाले। हेलिकॉप्टर के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में 48 लोगों को सुरक्षित निकाला गया और राशन सामग्री भी पहुंचाई गई। खीरगंगा में जलस्तर बढ़ने से बचाव दलों के लिए बनाई गई अस्थायी पुलिया बह गई थी, जिसे पुनः तैयार कर लिया गया है।