
उत्तरकाशी — धराली आपदा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आपदा सिर्फ घर और जमीन नहीं, बल्कि सपनों को भी उजाड़ देती है। डुंडा ब्लॉक के मालना गांव निवासी मनोज भंडारी के परिवार के साथ भी यही हुआ।
मनोज के पिता, राजेंद्र मोहन भंडारी, आईटीबीपी में सिपाही पद पर तैनात थे और 9 मई 1991 को पंजाब में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए मात्र 28 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए। उस समय मनोज की उम्र ढाई साल और उनकी मां कुसुम लता भंडारी की उम्र महज 21 वर्ष थी। पति की शहादत के बाद कुसुम लता ने बेटे को बेहतर शिक्षा देने के लिए संघर्ष की राह चुनी।
मां की मेहनत रंग लाई और 2011 में मनोज आईटीबीपी में उप निरीक्षक (फार्मासिस्ट) बने। उन्होंने मध्य प्रदेश, मातली और लद्दाख में सेवाएं दीं। 2020 में बीआरएस लेकर उत्तरकाशी लौट आए, ताकि मां और परिवार के साथ रहकर बेहतर जीवन जी सकें।
पर्यटन को बढ़ावा देने का सपना
मनोज ने उत्तरकाशी में मेडिकल व्यवसाय शुरू किया और फिर स्वरोजगार व पर्यटन के क्षेत्र में कदम रखा। 2024 में मां की पेंशन के एवज में बैंक से 50 लाख रुपये का ऋण लेकर, धराली में कल्प केदार मंदिर के नीचे सेब के बागानों के बीच 14 कमरों का रिसॉर्ट बनाया। रिसॉर्ट में सात लोगों को रोजगार मिला।
तबाही ने सब छीन लिया
5 अगस्त को खीर गंगा में आई भीषण बाढ़ में रिसॉर्ट मलबे में तब्दील हो गया। उस समय रिसॉर्ट में मौजूद तीन लोग किसी तरह बच निकले, लेकिन मनोज का सालों का सपना पलभर में खत्म हो गया।
मनोज ने भावुक होकर कहा— “पिता का चेहरा मैंने कभी ठीक से भी नहीं देखा था, लेकिन उनके नाम और बलिदान को आगे बढ़ाने के लिए जीवन भर मेहनत की। अब सब कुछ फिर से शुरू करना होगा।”