प्रदेश के पांच नगर निकायों में चुनाव का इंतजार जारी है। शहरी विकास विभाग स्तर पर परिसीमन सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं, लेकिन अब अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग को लेना है। इनमें से दो निकायों के मामले उत्तराखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के चलते प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है।
नरेंद्रनगर नगर पालिका का चुनाव वर्ष 2023 में प्रस्तावित था, लेकिन परिसीमन में देरी के कारण चुनाव समय पर नहीं हो सके। सरकार ने पहले एक गांव को इसमें शामिल किया और बाद में उसे हटा दिया, जिससे परिसीमन प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब परिसीमन और ओबीसी आरक्षण सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
वहीं, किच्छा नगर पालिका का मामला भी विवादों में है। वर्ष 2018 में पालिका के विस्तार के दौरान सिरौली कलां, बंडिया, देवरिया और आजाद नगर को इसमें शामिल किया गया था। बाद में 2024 में एक अधिसूचना जारी कर सिरौली कलां को अलग कर पुनः राजस्व गांव बनाने का प्रयास किया गया। इसके विरोध में स्थानीय निवासियों, जिनमें मोहम्मद यासीन समेत अन्य शामिल हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका में तर्क दिया गया कि बीते छह वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य हो चुके हैं। मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीन सितंबर 2024 की अधिसूचना पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद सरकार ने सिरौली कलां को अलग नगर पालिका के रूप में अधिसूचित कर दिया है, जिससे किच्छा और सिरौली कलां दोनों निकायों के चुनाव लंबित हैं।
इसके अतिरिक्त ऊधमसिंह नगर में गढ़ी नेगी और चंपावत जिले में पाटी नगर पंचायत का गठन किया गया है। इन निकायों में भी परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब चुनाव की घोषणा का इंतजार है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने बताया कि किच्छा और सिरौली कलां से जुड़े मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। न्यायालय के अंतिम आदेश के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।



