देहरादून। शोधार्थी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता दीवान नगरकोटी के जीवन, कार्यों और योगदान को समर्पित स्मृति पुस्तक ‘यादों में दीवान नगरकोटी’ का शुक्रवार को दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में अनावरण किया गया। पुस्तक में उनके साथियों के संस्मरणों के साथ उनके लेख और दुर्लभ छायाचित्र संकलित किए गए हैं। इस अवसर पर वक्ताओं ने दीवान नगरकोटी के शोध, पत्रकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद करते हुए उन्हें उत्तराखंड के सामाजिक सरोकारों से जुड़ी बौद्धिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पुस्तक का संपादन अरुण कुकसाल, जगमोहन रौतेला और चंद्रशेखर तिवारी ने किया है। कार्यक्रम में गिरि विकास अध्ययन संस्थान, लखनऊ के पूर्व निदेशक और दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. बी.के. जोशी ने दीवान नगरकोटी के साथ अपने लंबे जुड़ाव और आत्मीय संबंधों को साझा किया।
प्रो. जोशी ने कहा कि दीवान नगरकोटी उनके लिए परिवार के सदस्य की तरह थे। गिरि संस्थान में उत्तराखंड के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण से जुड़ी शोध परियोजना में वह उनके सहयोगी रहे। पर्वतीय समाज की गहरी समझ रखने वाले दीवान नगरकोटी एक विनम्र और कर्मठ व्यक्ति थे। उनका असामयिक निधन सभी के लिए बड़ा आघात था।
उन्होंने बताया कि शोध परियोजना के दौरान उत्तराखंड के कई युवा उनकी टीम से जुड़े थे। इनमें दीवान नगरकोटी के अलावा प्रदीप टम्टा, चंद्रशेखर तिवारी, अरुण कुकसाल और मंगल सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे। प्रो. जोशी ने कहा कि मित्रों और सहयोगियों की ओर से प्रकाशित यह स्मृति ग्रंथ दीवान नगरकोटी की यादों को सहेजने का सार्थक प्रयास है।
शोध से पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों तक रहा सफर
दीवान नगरकोटी ने शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ ही शिक्षा और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में प्रशिक्षक के रूप में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। पत्रकारिता के प्रति उनके विशेष रुझान ने उन्हें अल्मोड़ा में एक पहचान दिलाई। उनका जीवन शोध से पत्रकारिता और फिर सामाजिक कार्यों तक विस्तृत रहा। इस पूरी यात्रा में पहाड़ के समाज, उसकी समस्याओं और जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बनी रही।
कार्यक्रम में प्रवीन भट्ट, रानू बिष्ट, डी.के. पांडे, ललता प्रसाद, राजेंद्र कुकसाल, सुंदर सिंह बिष्ट, प्रेम पंचोली, कल्याण सिंह रावत, बसंती बिष्ट, योगेश भट्ट, राहुल कोटियाल, हेम पंत और दयाल पांडे सहित दीवान नगरकोटी के अनेक मित्र, सहयोगी, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. बी.के. जोशी ने दीवान नगरकोटी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान और स्मृतियों को सहेजने की आवश्यकता पर बल दिया।



